एशियाई ओलंपिक परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष सरदार रणधीर सिंह जी सपरिवार पधारे परमार्थ निकेतन
प्रमोद कुमार सम्पादक
ऋषिकेश, 5 जुलाई। एशियाई ओलंपिक परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष सरदार रणधीर सिंह जी सपरिवार परमार्थ निकेतन पधारे। सभी ने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में विश्व विख्यात गंगा आरती में सहभाग किया। स्वामी जी ने रूद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट कर पौधारोपण के लिये प्रेरित करते हुये कहा कि भारत की आज़ादी में पटियाला रियासत का महत्वपूर्ण योगदान है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने एशियाई खेलों के कार्यक्रम में योग को शामिल करने हेतु विशेष चर्चा की।
सरदार रणधीर सिंह जी ने कहा कि मैंने पिछली बार परमार्थ निकेतन गंगा आरती में सहभाग किया था और उस समय पूज्य स्वामी का योग विषय पर उद्बोधन सुना जिससे मैं इतना प्रभावित हुआ कि मैंने उनकी प्रेरणा से इस प्रस्ताव पर कार्य किया और 26 जून को भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष डॉ. पीटी उषा जी ने भी एशियाई खेलों के कार्यक्रम में योग को शामिल करने की जोरदार वकालत करते हुये एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने एशियाई खेल समुदाय से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले प्राचीन भारतीय खेल को शामिल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए खेलों के सबसे बड़े उत्सवों में योग को शामिल करने के प्रयासों का नेतृत्व करना महत्वपूर्ण है।
योग की आध्यात्मिक जन्मभूमि के रूप में भारत एशियाई खेलों और ओलंपिक खेलों में योग को शामिल करने के लिए अभियान चलाना जरूरी है। स्वामी जी ने सरदार रणधीर सिंह जी को धन्यवाद दिया कि वे परमार्थ निकेतन आये और इस विषय को संज्ञान में लिये तथा तुरंत ही इस विषय को आगे बढ़ाया और हमें सूचना दी कि स्वामी जी आप से मैं पिछली बार मिला और आप ने जो आशीर्वाद दिया वह पूरा होने जा रहा है। इस प्रस्ताव को आगामी जनरल असेंबली की मीटिंग में रखा जा रहा हैं तथा शीघ्र ही इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जायेगा। साथ ही एशियाई खेलों के अध्यक्ष व ओलंपिक खेलों के अध्यक्ष को अधिकारिक तौर पर भी पत्र लिखा जा रहा है। स्वामी जी ने कहा कि एशियाई ओलंपिक परिषद व सरदार रणधीर सिंह जी को इस दिव्य कार्य के लिये धन्यवाद दिया।
स्वामी जी ने एशियाई खेलों में योग को शामिल करने के विचार को प्रोत्साहित करते हुये कहा कि योग हमारे ऋषियों की पूरे विश्व को एक अमूल्य देन है। योग का मूल; योग की जड़ें भारतीय परंपरा में हैं इसलिये एशियाई खेलों और ओलंपिक खेलों में शामिल करने की जोरदार पहल करना अत्यंत आवश्यक है।
स्वामी जी ने कहा कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत की सबसे अमूल्य विधा योग को सबके लिये सुलभ बनाया। जैसे चांद, सूरज, सितारे, वायु, जल और नदियां सबके लिये है वैसे ही उन्होंने योग सब के लिये सर्वसुलभ बनाया। जिस प्रकार सूर्य निकलता है तो सब कुछ खिल जाता हैं उसी प्रकार जो भी योग करेगा वह निरोग रहेगा और जीवन खिलते हुये सूरज की तरह आनंद मय जीवन रहेगा। योग की शक्ति को पूरे विश्व ने मान भी लिया है। योग, हमारे जीवन में लिये अद्भुत इम्यूनिटी बूस्टर है। जीरो कास्ट और फायदे अनेक हैं जिस दिन हम यह समझ लंेगे हम स्वस्थ रहेंगे, परिवार स्वस्थ रहेंगे और देश मस्त रहेंगे।
स्वामी जी ने कहा कि योग, स्वस्थ जीवन के साथ समानता, सद्भाव और समरसता का भी संदेश देते हैं। योग किसी भी विरोध के लिये नहीं हैं, जहां पर सारे विरोध समाप्त हो जाये वहां योग का जन्म होता है। नफरत की दीवारों को तोड़ने का कार्य योग करेगा। शरीर को स्वस्थ रखने के लिये हम योग करते हैं परन्तु अब धरती योग की भी जरूरत है इसलिये एक पेड़ मां के नाम और दूसरा पेड़ धरती मां के नाम।
स्वामी जी ने एशियाई ओलंपिक परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष श्री रणधीर सिंह जी, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व, संरक्षक गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान और गोविंद वन्यजीव अभयारण्य श्री साकेत बडोला जी और विधायक अयोध्या श्री देवकीनन्दन गुप्ता जी को रूद्राक्ष का पौधा देकर मां गंगा के तट पर सभी का अभिनन्दन किया।
श्री रणधीर सिंह जी पूज्य स्वामी जी से मिलकर गंगा आरती में सहभाग कर अत्यंत प्रभावित हुये।
 

