गुरु निवास कनखल में स्वामी छत्रपति दास महाराज की पावन पुण्यतिथि मनायी गई

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार कनखल स्थित गुरु निवास में परम पूज्य गुरुदेव 1008 श्री स्वामी छत्रपति दास जी महाराज की पावन पुण्यतिथि बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लाह के साथ मनायी गई इस अवसर पर एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया परम पूज्य गुरुदेव छत्रपति दास महाराज ज्ञान का एक विशाल सूर्य थे एक सिद्धांतों पर चलने वाले संत थे और कहते थे जो मनुष्य गड्ढे में पड़ा है और अंधकार से धिरा है उसके जीवन पर ज्ञान रूपी प्रकाश का कोई महत्व नहीं होता ज्ञान को ग्रहण करने के लियें मस्तिष्क की आवश्यकता होती है और जिसका मस्तिष्क और ज्ञान चक्षु खुल न पाये हो उसका जीवन कीचड़ में बैठी भैंस की तरह होता है अगर उसके पास जाओगे तो तुम्हें भी कीचड़ में ही लथपथ कर देगी इसलिये लीचड़ कीचड़ और कीचड़ से हमेशा दूरी बनाकर रखो नहीं तो कीचड़ चिपट कर तुम्हारे कपड़े खराब कर देगा और चिचड़ तुम्हारे चिपटकर तुम्हारा खून चूस जायेगा और लीचड़ व्यक्ति अल्प बुद्धि होता है जो द्वार पर आने वाले का सम्मान करना नहीं जानता उसे तुम सिंहासन पर बैठा दो तब भी है जग हसाई और गलत संगत ही करेगा क्योंकि उसकी बुद्धि का विकास हुआ ही नहीं उसकी सोच और संगत सदैव उसके जैसे विचारों वाले लोगों के साथ ही होती है संत गंगा की तरह निर्मल और पावन होता है उसमें अपने और पराये का भेद नहीं होता और जिसमें भेद है वह संत नहीं वह सनातनी नहीं क्योंकि वह अपनी दर्वित बुद्धि से ग्रस्त है उसका मन विकारों से ग्रस्त है ज्ञान का उसकी बुद्धि पर कोई प्रकाश नहीं पड़ा उसकी बुद्धि सिर्फ पेट भरने तक सीमित हो जाती है स्वामी छत्रपति दास महाराज ने भक्तों को हरि भजन के माध्यम से भक्ति एवं कल्याण का मार्ग दिखाया वे दिए गए ज्ञान के रूप में सदैव हम लोगों के बीच विद्यमान रहेंगे इस अवसर पर महंत सुतीक्ष्ण मुनि महंत गोविंद दास महाराज स्वामी देवानन्द स्वामी श्याम प्रकाश स्वामी विनोद महाराज सहित अनेकों लोग उपस्थित थे