विरासत में मनुष्य को गुरु और पिता की संपत्ति मिल सकती है किंतु बुद्धि और संस्कार नहीं मिलते किंतु गुरु अपने शिष्य को अपने से भी अधिक तेजवान बना सकते हैं श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार 8 मई 2025 (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानन्द) श्यामपुर स्थित प्रसिद्ध श्री श्याम वैकुण्ठ धाम के परमाध्यक्ष तपस्वी ज्ञानेश्वर ज्ञान मूर्ति प्रातः स्मरणीय श्री महंत श्यामसुंदर दास जी महाराज ने कहा एक इंसान के पुत्र और एक गुरु के शिष्य को अपने पिता और गुरु की विरासत के रूप में उसकी संपत्ति प्राप्त हो सकती है किंतु उसकी बुद्धि और ज्ञान प्राप्त नहीं होता किंतु अगर सतगुरु चाहे तो अपने शिष्य को अपने से भी अधिक बुद्धिमान और श्रेष्ठ मस्तिष्क वाला बना सकते हैं पिता सिर्फ प्रयास कर सकता है कि उसका पुत्र शिक्षा ग्रहण करें संस्कार ग्रहण करें किंतु यह पुत्र पर निर्भर होता है कि वह करता है या नहीं कितना सक्षम होता है कभी भी उसे विरासत में पिता की बुद्धि और ज्ञान प्राप्त नहीं होता किंतु हमारे सतगुरु भजन पाठ पूजा सत्संग हमारी संगत को परिवर्तित कर हमारे भाग्य का उदय कर सकते हैं गुरु अपने शिष्य को अपने से भी अधिक बुद्धि मान ज्ञानवान बना सकते है और उसके भाग्य का उदय कर सूर्य के सामान तेजवान बना सकते है सतगुरु हमारे जीवन को दिशा प्रदान करते हुए अपने ज्ञान के माध्यम से मानव जीवन को सार्थक करते है ऐसे ही तपस्वी ज्ञान मूर्ति संत थे हमारे परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री पंडित राम गोपाल शर्मा अलवर वाले बाबा जी महाराज उन्होंने अपने अर्जित तपोबल के माध्यम से लाखों भक्तों के कष्ट हरे गुरुदेव द्वारा प्रदत्त ज्ञान जो मैंने कुछ अपने मस्तिष्क में गुरुदेव की कृपा से धारण किया मैं उनके बतायें मार्ग पर चलते हुए भक्तजनों के बीच ज्ञान को बांट रहा हूं गुरुदेव द्वारा दिखाया गया मार्ग उन्हें भी दिखा रहा हूं।