पत्रकारिता जगत में बहरूपियो की बाढ़ पत्रकारिता की आड़ में निकम्मे लोग पहुंच जाते हैं मठ मंदिर आश्रमों व संस्थानों में समाचार के नाम पर दिखाते हैं ठेंगा ठाकुर मनोजानन्द

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार, हरिद्वार तीर्थ नगरी में आज कल कुछ ऐसे कथा कथित लोग प्रवेश कर गये हैं जो संपूर्ण पत्रकारिता जगत को कलंकित कर रहे हैं ज्ञात होकी यह खानाबदोश बहुरूपिये हरिद्वार के मठ मंदिर आश्रम व संस्थानों में होने वाले कार्यक्रमों में पत्रकार बनकर पहुंच जाते हैं और संत महापुरुषों से एक बार दक्षिणा लेकर खा पीकर फिर वही खड़े हो जाते हैं उनके कहने पर की आपको तो दक्षिण मिल गई है फिर क्यों खड़े हो यह लोग मुंह पूछ कर खड़े हो जाते हैं और साफ मुकर जाते हैं कि हमें कुछ नहीं मिला फिर दोबारा करने के बाद तीसरी बार की फिराक में लग जाते हैं यह घूने निकमे खानाबदोश लोग संपूर्ण पत्रकारिता जगत को कलंकित कर रहे हैं समाचार के नाम पर लोगों को ठेंगा दिखाते हैं समाचार कहां लिखते हैं राम जाने आज तक तो किसी को दिखाया नहीं पहले यह लोग मेहनत मजदूरी कर दो ₹300 बड़ी मुश्किल से कमापाते थे और अभी हैं निकम्मे लोग हरामखोरी कर लोगों को झूठ बोलकर अपने आप को पत्रकार बनाकर प्रतिदिन हजारों रुपए बिना के कुछ किक धरे लुट कर ले जा रहे हैं हैं इन्हें नहीं पता की जिस दान के माल को यह लोग तीन-तीन चार चार बार खा रहे हैं और ले रहे हैं यह दान का माल 10 मुंह वाले राक्षस की तरह होता है अगर बिना परिश्रम किये समाचार लिखे और भजन करें इसे खाया तो यह तुम्हें खा जायेगा ऐसे लोग समाचार कहीं लगाते नहीं आश्रम में भंडारों में बैठकर माल खाकर निकाल लेते हैं कई कई बार दक्षिण भी लेते हैं और कर्म करते नहीं इन लोगों को डूब मरना चाहिये धार्मिक संस्थाओं का इस प्रकार धन खाना एक दिन तुम्हें ले डूबेगा और तुम्हारी करनी कथनी अब सबके सामने आने लग रही है तुम्हारा छेद वाला जहाज जल्दी ही मामूली सी बरसाती नदी में डूबने वाला है और तुम्हारी गुत्थी भी पीटने वाली है अभी भी समय है बाज आ जाओ नहीं तो तुम्हारी गुत्थी पीटते हुए यह संपूर्ण समाज देखेगा और हर आदमी तुम्हारे पर थूकेगा कि तुम लोग दो ₹400 के लियें बहुरूपिये बनकर बिना समाचार लगाये लोगों को ठग रहे थे और तुम्हारी पोल खुल जायेगी यह बात किसी सम्मानित पत्रकार के के लियें नहीं है सिर्फ ऐसे लोगों के लिए है जो आश्रमों में पत्रकार बनकर समझते हैं और समाचार कहीं नहीं लगाते हमारा इरादा किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं है केवल कार्यशैली में सुधार लाने का की या तो सुधर जाओ या पत्रकारिता जगत से बाहर जाओ यह सलाह वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद ने ऐसे लोगों को दी है जो पत्रकारिता को प्रतिदिन कलंकित करने का कार्य कर रहे हैं