पतंजलि विश्वविद्यालय में सत्रारंभ कार्यक्रम आयोजित: डॉ. अवध ओझा और आचार्य बालकृष्ण ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों से किया संवाद

सम्पादक प्रमोद कुमार
इतिहास सिर्फ अतीत नहीं, राष्ट्र निर्माण की नींव है” — डॉ. अवध ओझा
 
परंपरा और संस्कृति का अनुपम मॉडल है पतंजलि — आचार्य बालकृष्ण
हरिद्वार, 8 जुलाई 2025। पतंजलि विश्वविद्यालय में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागतार्थ सत्रारंभ कार्यक्रम का भव्य आयोजन विश्वविद्यालय सभागार में किया गया। इस अवसर पर देश के प्रख्यात इतिहासकार, शिक्षाविद् एवं करियर काउंसलर डॉ. अवध ओझा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने “भारतीय इतिहास की प्रासंगिकता” विषय पर एक अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया।
डॉ. ओझा ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में इतिहास की आवश्यकता, उपयोगिता एवं समकालीन संदर्भों में उसकी भूमिका पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि वह आधार है जिस पर किसी भी राष्ट्र का वर्तमान और भविष्य टिका होता है।” उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्रबोध, कर्तव्यबोध और सांस्कृतिक चेतना के लिए इतिहासबोध को अनिवार्य बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने महाभारत, चाणक्य नीति, मौर्य व गुप्तकाल, सम्राट अशोक जैसे महानायकों का उल्लेख करते हुए यह बताया कि भारतीय इतिहास सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रेरणास्रोत है। उन्होंने बलपूर्वक कहा कि इतिहास को औपनिवेशिक दृष्टिकोण से हटाकर स्वदेशी दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी अपने अतीत को सच्चे रूप में जान सके।
डॉ. ओझा ने औद्योगिक क्रांति का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि आज के समय में किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आर्थिक मजबूती में निहित है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भारत के गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य के भारत के निर्माण में योगदान दें।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने भी नवप्रवेशित विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय में वैदिक परंपरा को मूर्त रूप में सिखाया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से योग, एकाग्रता और ध्यानमग्न होकर अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारा अतीत – हमारे ग्रंथ, वेद और उपनिषद – हमें वर्तमान की चुनौतियों से जूझने की क्षमता प्रदान करते हैं।
पतंजलि को परंपरा और संस्कृति का अनुपम मॉडल है बताते हुए आचार्य बालकृष्ण ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के मानवीकी एवं प्राच्यविद्या संकाय की संकायाध्यक्ष प्रो. साध्वी देवप्रिया, भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एन.पी. सिंह, पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. मयंक कुमार अग्रवाल, कुलानुशासक आर्ष देव, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के केंद्रीय प्रभारी स्वामी परमार्थदेव, समस्त अधिकारीगण, संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल शैक्षणिक विमर्श तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों में अपने इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति गौरव और उत्तरदायित्व की भावना जागृत करना था।