29 August 2025

उत्तराखंड राज्य के बनाए जाने का सपना देखने वाले व संघर्ष करने वाले आंदोलनकारी चिन्हित होने से वंचित:-मनोज ठाकुर

विज्ञापन

हरिद्वार 19 अगस्त 2023 उत्तराखंड राज्य बनाए जाने हेतु संघर्ष करने वाले बहुत से आंदोलनकारी आज भी चिन्हित होने से वंचित हैं इसे व्यवस्था का दोष बताएं या सरकार की नाकामी ज्ञात हो कि वर्ष 2016 मे तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत ने आंदोलनकारी चिन्हित करने की घोषणा की तत्पश्चात वर्तमान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने 2021 में 31 दिसंबर तक राज्य बनाए जाने हेतु संघर्ष करने वाले चिन्हित होने से वंचित आंदोलनकारियों को चिन्हित करने हेतु शासनादेश जारी किया किंतु हरिद्वार जनपद में शासनादेश के क्रम में एक भी आंदोलनकारी चिन्हित नहीं किया गया इससे पूर्व चिन्हित किए गए आंदोलनकारी चिन्हित किए जाने में चिन्हितकारने वाली समिति के सदस्यों ने चिन्हित किए जाने में भारी धांधली की तथा आंदोलनकारी चिन्हित करने की व्यवस्था को परिवारवाद की आग में झोंक दिया तथा सदस्य होने अपने परिजन पुत्र पुत्री पत्नी दादा दादी नाना नानी चाचा चाची बुआ फूफा आदि को चिन्हित करने में महारत हासिल करते हुए चयन से वंचित आंदोलनकारी की ओर कभी कोई ध्यान दिया ही नहीं सिर्फ यही तय करते रहे की इतने मेरे होने हैं और इतने तुम्हारे होने हैं किंतु चिन्हित होने से वंचित आंदोलनकारी चिन्हित किए जाने की बाट ही जोहते रहे सरकार तथा शासन का ध्यान बार-बार ईश्वर आकर्षित करने के बाद भी चिन्हित होने से वंचित आंदोलनकारी के बारे में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया फर्जी साक्ष के आधार पर चिन्हित होने वाले बहुत से आंदोलनकारी सरकारी सुविधा तथा पेंशन पर मौज काट रहे हैं पूर्व में ऐसे ऐसे आंदोलनकारी चिन्हितकरण समिति ने चिन्हित किए हैं जो आंदोलन के समय हरिद्वार जनपद में थे ही नहीं बहुत से तो आंदोलन के समय अपनी मां के गर्भ में पल रहे थे बहुत सी ऐसी विभूतियां भी चिन्हित हुई हैं जिनके चिन्हित किए जाने हेतु लगाए गए दस्तावेज समाचार कातरने वर्ष 2007 व 2009 की लगी है बहुत सी ऐसी महिलाएं चिन्हित की गई तो आंदोलन के समय दूसरे परदेस व जनपदों की निवासी थी व बहुत से महानुभाव जिस दिन के उन्होंने साक्ष्य लगाए हैं उन दिनों में अपने प्रतिष्ठानों में विभागों में ड्यूटी पर तैनात थे वहां उनकी हाजिरी लगी हुई है तो वह आंदोलन में कब आए और कब उन्होंने आंदोलन में भाग लिया बहुत से ऐसे समाचार पत्रों की कतरन बैक डेट में छाप कर चिन्हित किए जाने हेतु इस्तेमाल की गई हैं जो उत्तराखंड बनने के बाद में प्रकाशित हुए हैं अगर उनकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा उत्तराखंड आंदोलन में भाग लेने वाले तथा सन 1994 को रामपुर तिराहा कांड में घायल होने वाले युवा आंदोलनकारी ठाकुर मनोज कुमार मनोजानंद ने चिन्हित होने से वंचित आंदोलनकारियों को चिन्हित किए जाने की मांग की साथ ही उन्होंने बताया की उनके साथ चिन्हित किए जाने में छल हुआ है बहुत से ऐसे लोग चिन्हित हुए हैं जिनका आंदोलन से दूर-दूर तक कोई लेना नहीं देना नहीं था वह उत्तराखंड बनाए जाने का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों के सदस्य थे किंतु मेरे साथ पहाड़ तथा मैदानी वाद का खेल खेला गया आंदोलन के समय हम साथ में थे किंतु चिन्हित के जाते समय हम प्लेन के होने के कारण भेदभाव के कारण चिन्हित होने से आज तक भी वंचित है।

विज्ञापन

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ये भी पढ़ें

Copyright © All rights reserved. | Sakshar Haridwar Powered by www.WizInfotech.com.