निरंजनी अखाड़े की छावनी मे 18 मढ़ी के 325 नागा साधुओ ने ली सन्यास की दिक्षा

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सम्पादक प्रमोद कुमार हरिद्वार 

नागा साधु अखाड़े की शान होते हैं- श्री महंत रवींद्र पुरी

 

वरिष्ठ पत्रकार राकेश वालिया प्रयागराज, महाकुम्भ 2025 मे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि आज 18 मढ़ी के 325 साधुओ कों नागा सन्यास दीक्षा दी गईं।जिसमे 10 महिला साधु और 315 पुरुष साधुओ का संस्कार सेक्टर 20के पीपा पुल नंबर 5और 6 के बिच संगम पर बने घाट पर हुआ।
उन्होंने कहा की सभी ने अपने गुरुओं से आज्ञा लेकर नागा सन्यास संस्कार की दीक्षा की परंपरा मे शामिल हुए हैं।उन्होंने कहा की नागा सन्यासियों को विशेष रूप से तपस्वी और संयमी माना जाता है, जो सांसारिक वासनाओं से परे रहते हैं और केवल आत्मा की साधना में ही ध्यान रत रहते हैं।उन्होंने कहा की नागा संत दीक्षा में व्यक्ति को सांसारिक जीवन से पूरी तरह से विरक्त होकर सन्यास लेने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। वे अपना नाम, परिवार और सभी सांसारिक रिश्तों को छोड़कर एक नये जीवन की शुरुआत करते हैं।उन्होंने कहा की दीक्षा के दौरान साधक को त्रिशूल और अन्य धार्मिक प्रतीक दिए जाते हैं, जो उनकी आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक होते हैं।उन्होंने कहा की दीक्षा देने वाले गुरु की उपस्थिति और आशीर्वाद इस परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। गुरु के निर्देशन में साधक अपनी साधना को सही दिशा में बढ़ाता है।उन्होंने कहा की नागा संत समाज से दूर रहते हुए भी समाज के कल्याण के लिए कार्य करते हैं, जैसे कि धार्मिक प्रचार, शिक्षा, और अन्य सेवा कार्य।उन्होंने कहा की नागा संत दीक्षा एक कठिन और गहन साधना प्रक्रिया है, जो 48 घण्टे मे पुरी होती हैं। जिसमे गंगा तट पर ही मुंडन जनेऊ और पिंडदान समेत अन्य संस्कार कराए जाते हैं। उन्होंने बताया की इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही सन्यास की दीक्षा पूरी होती है। इसलिए अखाड़ों की पेशवाई मे श्रद्धांलू उनके दर्शन कर उनके चरणों की धूल अपने मस्तक से लगाकर नतमस्तक होते हैं इस अवसर पर अखाड़ा सचिव श्री महंत रामरतन गिरी ,महंत दिनेश गिरी, महंत राधे गिरी, महंत भूपेन्द्र गिरी, महंत ओमकार गिरी,महंत शिवबन,महंत नरेश गिरी,महंत राज गिरी आदि के संग अनेक संत महापुरुष उपस्थित रहे।

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