15 August 2026

एक साधक संत बनने के लिये मन से अपना पराया इसका उसका त्यागने के साथ-साथ भगवान को मन मस्तिष्क में धारण करना पड़ता है महामंडलेश्वर श्री तेजसानन्द गिरी महाराज

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सम्पादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार 28 फरवरी 2025 (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानन्द) श्री श्री भोलानंद सन्यास आश्रम भोलागिरी रोड हरिद्वार में विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया इस अवसर पर भक्तजनों के बीच ज्ञान की वर्षा करते हुए महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 परम पूज्य स्वामी तेजसानन्द गिरि जी महाराज ने कहा गुरु मिलाते हैं ईश्वर से गुरु ही देते ज्ञान भवसागर की नैया के गुरु ही तारणहार सतगुरु इस पृथ्वी लोक पर साक्षात ज्ञान का एक विशाल सूर्य होते हैं जिनके ज्ञान रूपी सरोवर में स्नान करने के बाद भक्तों का जीवन धन्य तथा कृतार्थ हो जाता है मनुष्य को एक संत साधक होने के लिए मन के सभी विकारों को त्यागना पड़ता है भला बुरा अपना पराया इसका उसका तेरा मेरा जिसके मन में संत होने के बाद भी बस हो वह एक सच्चा साधक नहीं हो सकता सच्चा साधक बनने के लिए मन को एकाग्र करना पड़ता है और इच्छाओं आवश्यकताओं पर अंकुश लगाना पड़ता है तब मन में सच्चा वैराग्य उत्पन्न होता है इस अवसर पर हरिद्वार के अनेको मठ मंदिरों आश्रमों से आये संत महापुरुषों ने भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया इस अवसर पर सचिव श्री राजगिरी जी महाराज महंत शुक्र गिरी महाराज स्वामी कमलेशानन्द महाराज महंत शांति प्रकाश महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष उपस्थित थे।

 

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