गंगा घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब, छठ व्रतियों के देखने जुटी भारी भीड़
सम्पादक प्रमोद कुमार
अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को असंख्य अर्घ्य समर्पित
 
हरिद्वार। धर्मगनगरी में चार दिनी लोक आस्था का महापर्व छठ पूजन को लेकर गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जिसमें छठ व्रतियों ने अस्त होते भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य देने के लिए रंग-बिरंगे परिधान व विशेष साज-सज्जा के साथ घाटों पर पहुंची व्रती महिलाओं ने आस्था के महापर्व पर अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य प्रदान कर मनोकामनाएं पूर्ति का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान छठी मैया के गीतों से वातरण गुंजायमान हो गयाा और हरिद्वार के समस्त घाटों पर उत्सव का नजारा देऽने को मिला। छठ व्रतियों को देऽने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। घाट पर छठ व्रतियों के आने-जाने के दौरान सड़कों पर भारी जाम लगा रहा। मंगलवार की भोर में व्रतियां उदित सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ महापर्व का समापन करेंगी।
सूर्याेपासना एवं लोक आस्था के पर्व छठ पर्व के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य प्रदान करने के लिए छठ व्रतियों की भीड़ गंगा घाटों पर जुटी। दोपहर तीन बजे से ही छठ का डाला लेकर श्रद्धालुओं का गंगा घाट पहुंचने क्रम जारी हो गया। छठ व्रतियों के लिए गंगा घाटों को दुल्हन की तरह सजाया गया। पारंपरिक धुनों पर आधारित गीत संगीत से वातावरण गुंजायमान रहा। छठ व्रतियों ने ठंडे जल में ऽड़े रहकर भगवान सूर्यनारायण के अस्त होने का इंतजार किया। जैसे ही सूर्य नारायण असस्त हुए, व्रतियों ने अर्घ्य प्रदान कर परिवार की ऽुशहाली का आशीर्वाद मांगा। पूर्वांचल समाज से जुड़ी संस्थाओं की ओर से घाटों पर रंगारंग कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
पूर्वांचल उत्थान संस्था के सदस्य आचार्य उद्धव मिश्रा ने बताया कि हिंदू धर्म में जहां सिर्फ उगते हुए सूर्य को ही अर्घ्य देने का विधान है वहीं छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की जाती है। इसके पीछे मान्यता है कि डूबते समय सूर्य देव अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ में होते हैं और इस समय इनको अर्घ्य देने से जीवन में चल रही हर प्रकार की बाधायें दूर होती है और मनोकामना पूर्ति होती है।
बताते चलें कि कार्तिक माह में छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है, यह पर्व सूर्य देव को समर्पित होता है। इस पर्व को महिलाएं संतान की ऽुशहाली और लंबी आयु के लिए रऽती हैं। पूर्वांचल उत्थान संस्था, पूर्वांचल जन जागृति संस्था, पूर्वांचल महासभा, छठ पूजा आयोजन समिति, पूर्वांचल उत्थान सेवा समिति सहित अन्य पूर्वांचल की संस्थाओं तत्वावधान में छठ महापर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। हरिपुर कलां में गीता कुटीर घाट से लेकर हरकी पैड़ी, प्रेमनगर आश्रम, जटवाड़ा पुल बहादराबाद में गंगनहर पुल के समीप छठ घाट सहित कनऽल के राधा रास बिहारी सहित अन्य घाटों की साफ सफाई की व्यवस्था को चाक चौबंद किया गया है। बैरागी कैंप, गोविंद घाट, प्रेमनगर आश्रम घाट, पुल जटवाड़ा घाट, विश्वकर्मा घाट, पायलट बाबा सहित सभी घाटों पर उत्सव का नजारा देऽने को मिला। इस बीच छठ के परंपरागत गीत कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए, सुगवा जे मरबो धनुष से सुगा जईहे मुरझाय आदि से पूरा वातावरण गुंजायमान होता रहा। हर ओर बस महिलाओं की मधुर आवाज में छठ की परंपरागत गीत गूंज रहे थे। इससे पूरा वातावरण भत्तिफ़मय रहा। इस बीच मन्नत आदि वाले लोग घाटों पर गाजे-बाजे के साथ पहुंचे तो बच्चों ने जमकर आतिशबाजी भी की। महापर्व पर हर ओर अप्रतिम उल्लास व उत्साह दिऽ रहा था। इसमें बच्चे व युवा तो और भी उत्साहित दिऽे। इसमें बांस की दौरी व सुपली आदि में पूजन सामग्री व फलों को लेकर पुरुष व बच्चे आगे-आगे चल रहे थे। इस बीच घाटों पर बच्चों ने जमकर आतिशबाजी भी की।
छठ पूजा का महत्व बताते हुए पं भोगेन्द्र झा ने बताया कि छठ पर्व में सूर्य देव और छठी माता की पूजा की जाती है। सूर्य को जीवनदाता माना जाता है और छठी माता को संतान की देवी इस पर्व के माध्यम से लोग इन देवताओं से अपने परिवार की ऽुशहाली और संतान की लंबी उम्र की कामना करते हैं। छठ पर्व के दौरान प्रकृति के विभिन्न तत्वों जैसे जल, सूर्य, चंद्रमा आदि की पूजा की जाती है, यह प्रकृति के प्रति आभार व्यत्तफ़ करने का एक तरीका है और हमें प्रकृति के संरक्षण का महत्व सिऽाता है। छठ का व्रत बहुत कठिन होता है, व्रतधारी 36 घंटे तक बिना पानी पिए रहते हैं साथ ही छठ पर्व सभी वर्गों और समुदायों के लोगों को एक साथ लाता है- इस पर्व के दौरान लोग मिलकर पूजा करते हैं।
पूर्वांचल उत्थान संस्था के अध्यक्ष सीए आशुतोष पांडेय, महासचिव बीएन राय, रंजीता झा, काली प्रसाद साह, विष्णु देव ठेकेदार, विनोद शाह रामसागर जायसवाल, रामसागर यादव धर्मेंद्र साह नंदलाल शर्मा, पं भोगेन्द्र झा, पंडित विनय मिश्रा, दिलीप कुमार झा, डॉ निरंजन मिश्रा, डॉ नारायण पंडित, कामेश्वर सिंह यादव, रूपलाल यादव वरूण शुक्ला, संतोष पांडेय, धनंजय झा, आचार्य उद्धव मिश्रा, रामरतन, बिरंजन प्रसाद, जीतनाथ, रणजीत, अबधेश झा, अरविंद झा, मंटू झा, देवेन्द्र झा, शुभम झा, सागर झा, शशि भूषण पांडेय, राकेश शर्मा, राकेश राय, मदन झा, सहित अन्य गणमान्य सदस्यों ने परिवार सहित छठ पर्व मनाया।
पारंपरिक गीतों को गाती रहीं महिलाएं
हरिद्वार। हरकी पैड़ी, बिरला घाट, गोविन्दपुरी, प्रेम नगर आश्रम घाट, शिवालिक नगर शिव मंदिर, कनखल के शीतला माता घाट, भेल सेक्टर-4 हनुमान मंदिर, बहादरबाद नंगनहर घाट सहित अनेक घाटों पर शाम को व्रती महिलाओं ने अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया। शाम होते ही लोग अपने सिर पर बांस के दौरों में चढ़ावा लेकर चल दिए। इनके पीछे पारंपरिक गीत गाती हुई महिलाएं जा रही थी। वहीं घाटों के किनारों को दीपों से सजाया गया था तो वेदियां आकर्षण का केंद्र बन रही। बच्चे कहीं-कहीं आतिशबाजी अभी कर रहे थे। वही पूरा माहौल छठ के पारंपरिक गीतों की ध्वनि से गूंज रहा था।

