23 February 2026

गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा द्वारा सात तपस्वी संतों का ‘महामंडलेश्वर’ पद पर विधिवत पट्टाभिषेक तथा ‘चादर विधि’ संपन्न कराई गई।

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सम्पादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार,हरिद्वार की इस पुण्यभूमि पर संपन्न यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा और गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंतता का प्रमाण प्रस्तुत करेगा। गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े का यह प्रयास सनातन संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े का दिव्य पट्टाभिषेक समारोह

 

सात संतों का ‘महामंडलेश्वर’ पद पर अलंकरण, सनातन परंपरा में जुड़ा स्वर्णिम अध्याय

देवभूमि हरिद्वार सदा से भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और तप की पावन धरती रही है। उसी आध्यात्मिक चेतना को साकार करता एक भव्य, ऐतिहासिक और ऊर्जामय समारोह कनखल, माँ आनंदमई रोड स्थित परमार्थ ज्ञान मंदिर प्रतिष्ठित आश्रम में संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन अखाड़ा परंपरा के गौरव का विराट उद्घोष था।

गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा द्वारा सात तपस्वी, साधनारत और समाजनिष्ठ संतों का ‘महामंडलेश्वर’ पद पर विधिवत पट्टाभिषेक तथा पारंपरिक ‘चादर विधि’ संपन्न कराई गई। संपूर्ण अनुष्ठान अखाड़े के अध्यक्ष, परम वंदनीय गुरु भगवान श्री संजीवन नाथ महाराज के पावन सानिध्य एवं दिव्य मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। उनकी तेजस्वी उपस्थिति ने पूरे समारोह को आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा से ओत-प्रोत कर दिया।

महामंडलेश्वर पद: गौरव, नेतृत्व और उत्तरदायित्व का संगम

सनातन परंपरा में ‘महामंडलेश्वर’ केवल एक पद नहीं, बल्कि धर्मध्वजा को ऊँचा रखने का संकल्प है। ‘मंडल’ और ‘ईश्वर’ से मिलकर बना यह शब्द उस आध्यात्मिक नेतृत्व का प्रतीक है, जो ज्ञान, वैराग्य, सेवा और अनुशासन का सजीव रूप होता है। अखाड़ा परंपरा में महामंडलेश्वर धर्मरक्षा, संस्कृति संवर्धन और समाज जागरण के अग्रदूत माने जाते हैं।

इस अवसर पर

महामंडलेश्वर साईं माँ नाथ महाराज

महामंडलेश्वर दीपिका नाथ महाराज (राष्ट्रीय महिला महामंत्री)

महामंडलेश्वर तारानाथ महाराज

महामंडलेश्वर ज्ञानेश जी महाराज

महामंडलेश्वर आशुतोष नाथ महाराज

महामंडलेश्वर भाविका नाथ महाराज

श्री श्री योगी नंद नाथजी महाराज (प्रदेश प्रभारी, हरियाणा)

का वैदिक रीति से पट्टाभिषेक कर उन्हें अखाड़ा परंपरा की गरिमा और उत्तरदायित्व से अलंकृत किया गया।

चादर विधि: समर्पण, त्याग और धर्मरक्षा का दिव्य संकल्प

शंखध्वनि की अनुगूंज, वैदिक मंत्रोच्चार की पवित्र लय और “अलख निरंजन” के जयघोष से पूरा आश्रम परिसर भक्तिरस में डूब गया। गुरुओं द्वारा संतों को चादर ओढ़ाने की यह पावन विधि इस बात की घोषणा है कि अब उनका जीवन व्यक्तिगत सीमाओं से ऊपर उठकर समाज, संस्कृति और राष्ट्र के कल्याण हेतु समर्पित रहेगा।

यह चादर केवल वस्त्र नहीं, बल्कि तप, त्याग और अनुशासन की वह मर्यादा है, जो संतों को अखाड़े की दिव्य परंपरा से जोड़ती है।

इसी पावन अवसर पर आचार्य श्री चंद्रभूषणानंद जी महाराज की तिलक एवं चादर विधि भी हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुई। समारोह में पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. अनीता योगेश्वरी जी महाराज, महामंडलेश्वर प्रेम दास महाराज, स्वामी प्रेम चैतन्य महाराज, स्वामी अवेधानन्द जी महाराज सहित अनेक संत-महापुरुषों और श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

धर्म और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सशक्त कदम

यह आयोजन केवल पद अलंकरण का समारोह नहीं था, बल्कि धर्म और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त संकल्प का उद्घोष था। नव-अलंक्रित महामंडलेश्वरों ने समाज में समरसता, आध्यात्मिक जागरण, नारी सशक्तिकरण और सनातन मूल्यों की स्थापना का दृढ़ संकल्प लिया।

हरिद्वार की इस पुण्यभूमि पर संपन्न यह दिव्य आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा। यह गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंतता, अखाड़ा व्यवस्था की मर्यादा और सनातन संस्कृति की अक्षुण्ण शक्ति का सशक्त प्रमाण है।

निश्चय ही गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े का यह दिव्य प्रयास सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण और राष्ट्र की आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

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