20 August 2026

आईआईटी रुड़की ने राष्ट्रीय भवन निर्माण मानकों (एनबीसीएस 2026) पर बीआईएस कार्यशाला आयोजित की

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संपादक प्रमोद कुमार

• कार्यशाला में बीआईएस और आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों ने भाग लिया और भवन निर्माण के नवीनतम राष्ट्रीय मानकों के प्रति जागरूकता तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया

 

 

रुड़की, उत्तराखंड, 20 अगस्त, 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने आईआईटी रुड़की में बीआईएस चेयर तथा भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), नई दिल्ली के सहयोग से जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन (डब्ल्यूआरडीएम), आईआईटी रुड़की के व्याख्यान कक्ष में राष्ट्रीय भवन निर्माण मानक (एनबीसीएस 2026) पर एक कार्यशाला का आयोजन किया।

 

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत मुख्य अतिथि थे, जबकि श्री संजय पंत, उप महानिदेशक (मानकीकरण), बीआईएस, नई दिल्ली, ने उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता की। कार्यशाला में बीआईएस, आईआईटी रुड़की और पेशेवर समुदाय के विशेषज्ञ एकत्रित हुए और एनबीसीएस 2026 के प्रावधानों, प्रासंगिकता तथा क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया। साथ ही, सुरक्षित, सुदृढ़ और गुणवत्तापरक निर्माण पद्धतियों को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर भी चर्चा की गई।

 

आईआईटी रुड़की में बीआईएस चेयर प्रोफेसर प्रो. दीपक खरे ने स्वागत संबोधन दिया और भारतीय मानकों के प्रति जागरूकता एवं व्यावहारिक समझ को सुदृढ़ करने में कार्यशाला के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्रीय मानकों के प्रति छात्रों की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया और क्विज, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को जोड़ने के लिए आईआईटी रुड़की की पहलों पर प्रकाश डाला। इन पहलों का उद्देश्य शैक्षणिक एवं व्यावसायिक संदर्भों में मानकों के प्रति व्यापक जागरूकता और उनके सार्थक अनुप्रयोग को प्रोत्साहित करना है।

 

कार्यशाला में राष्ट्रीय भवन निर्माण मानक (एनबीसीएस 2026) के प्रावधानों और अनुप्रयोगों के प्रति जागरूकता एवं समझ बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इस पहल में राष्ट्रीय मानकों को शैक्षणिक ज्ञान, व्यावसायिक व्यवहार, अनुसंधान और संस्थागत अवसंरचना विकास के साथ एकीकृत करने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

 

सभा को संबोधित करते हुए, श्री संजय पंत, उप महानिदेशक (मानकीकरण), बीआईएस, नई दिल्ली ने अद्यतन मानकों के महत्व और उनके प्रभावी राष्ट्रव्यापी अपनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय भवन निर्माण मानक 2026 देश में सुरक्षित, सुदृढ़ और गुणवत्तापरक निर्माण के लिए ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करते हैं। मानक तभी अपने अपेक्षित प्रभाव को प्राप्त कर सकते हैं, जब उन्हें अच्छी तरह समझा जाए और प्रभावी रूप से व्यवहार में लागू किया जाए। इसलिए छात्रों, शिक्षकों, वास्तुकारों, अभियंताओं और अन्य हितधारकों के बीच जागरूकता बढ़ाना तथा उनके प्रावधानों पर सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। इंजीनियरिंग, वास्तुकला और आपदा प्रत्यास्थता में अपनी मजबूत बहु-विषयक विशेषज्ञता के साथ आईआईटी रुड़की इस तरह की सहभागिता के लिए एक आदर्श मंच प्रदान करता है। बीआईएस और आईआईटी रुड़की के बीच सहयोग क्षमता निर्माण और एनबीसी 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देने में योगदान देगा।”

 

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने अनुसंधान, शिक्षा और बहु-विषयक सहयोग के माध्यम से सुरक्षित, सुदृढ़ और सतत अवसंरचना को आगे बढ़ाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आईआईटी रुड़की की देश में सुरक्षित, सुदृढ़ और सतत अवसंरचना की नींव को मजबूत करने के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता रही है। राष्ट्रीय मानक इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण ढांचा प्रदान करते हैं। बीआईएस के साथ हमारे सहयोग के माध्यम से, हम मानकों को अनुसंधान, शैक्षणिक विशेषज्ञता और क्षेत्रीय स्तर पर क्रियान्वयन से जोड़ने का प्रयास करते हैं, साथ ही अपने छात्रों और पेशेवरों को विकसित होती निर्माण पद्धतियों की गहरी समझ से सुसज्जित करते हैं। इस प्रकार की सहभागिताएं तकनीकी ज्ञान को ऐसे समाधानों में परिवर्तित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो एक सुरक्षित और अधिक सुदृढ़ निर्मित वातावरण में योगदान दें।”

 

कार्यशाला में श्री संजय पंत, उप महानिदेशक (मानकीकरण), बीआईएस, को राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) के विकास और उसके क्रमिक उन्नयन में उनके अग्रणी योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। मानकीकरण के क्षेत्र में 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, श्री संजय पंत ने एनबीसी को सुदृढ़ बनाने के लिए अपने निरंतर प्रयासों सहित विभिन्न बीआईएस मानकों के विकास, निर्माण, संशोधन और अद्यतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके व्यापक अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता ने देश में भारतीय मानकों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

 

कार्यक्रम में एक तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसका संचालन भारतीय मानक ब्यूरो और पेशेवर समुदाय के विशेषज्ञों द्वारा किया गया। श्री अभिषेक पाल, वैज्ञानिक डी/संयुक्त निदेशक (सिविल इंजीनियरिंग), बीआईएस ने “राष्ट्रीय भवन निर्माण मानकों (एनबीसीएस 2026) का अवलोकन” विषय पर प्रस्तुति दी, जिसमें अद्यतन मानकों में किए गए प्रमुख संशोधनों और उन्नयनों को समझाया गया। श्री संदीप गोयल ने “एनबीसीएस 2026 के अग्नि एवं जीवन सुरक्षा पहलू” विषय पर प्रस्तुति दी और सुरक्षित एवं अधिक सुदृढ़ भवन निर्माण पद्धतियों के लिए उनके महत्व पर प्रकाश डाला। श्री दीपक अग्रवाल, प्रमुख, मानक समन्वय एवं निगरानी विभाग (एससीएमडी), बीआईएस, नई दिल्ली ने “मानकीकरण में अकादमिक संस्थानों का महत्व” विषय पर विचार व्यक्त किए और राष्ट्रीय मानकों के प्रति जागरूकता, अनुसंधान तथा प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

 

तकनीकी सत्र के बाद ओपन-हाउस संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के साथ संवाद करने, स्पष्टीकरण प्राप्त करने और एनबीसीएस 2026 के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा करने का अवसर मिला। इस संवाद ने छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के बीच विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया और मानकों तथा उनके क्रियान्वयन पर शैक्षणिक एवं व्यावसायिक संवाद को और सुदृढ़ किया।

 

कार्यशाला में आईआईटी रुड़की के विभिन्न विषयों के संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, छात्रों और पेशेवरों ने भाग लिया, जो राष्ट्रीय भवन निर्माण मानकों की बहु-विषयक प्रासंगिकता को दर्शाता है। सिविल इंजीनियरिंग, भूकंप इंजीनियरिंग, आपदा प्रबंधन, डब्ल्यूआरडीएम, जलविज्ञान, एचआरईडी, रासायनिक इंजीनियरिंग और वास्तुकला, के साथ-साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर वर्क्स विभाग (आईडब्ल्यूडी) और सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

 

एनबीसीएस 2026 के प्रति व्यापक सहभागिता को बढ़ावा देने की पहल के तहत, आईआईटी रुड़की ने 17 अगस्त, 2026 को राष्ट्रीय भवन निर्माण मानक (एनबीसीएस 2026) पर एक क्विज आयोजित की। पुरस्कारों में प्रथम स्थान के लिए ₹15,000, द्वितीय स्थान के लिए ₹10,000 और तृतीय स्थान के लिए ₹5,000, के साथ-साथ ₹2,000 के पांच सांत्वना पुरस्कार शामिल थे। उद्घाटन सत्र के दौरान विजेताओं को सम्मानित किया गया:

 

प्रथम पुरस्कार: राहुल भसीन, इंटरनेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डैम्स (आईसीईडी)

द्वितीय पुरस्कार:· सागर जायसवाल, सिविल इंजीनियरिंग विभाग

तृतीय पुरस्कार: · अक्षत गुप्ता, जैव विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग

 

सांत्वना पुरस्कार विजेता:

· रिशव कुमार, गणित विभाग

· सुशांत राहुल, सिविल इंजीनियरिंग विभाग

· अनुभव अनुराज, मैकेनिकल एवं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग

· मोहम्मद मेहदी नासेरी, सिविल इंजीनियरिंग विभाग

· आयुष मौर्य, मेहता फैमिली स्कूल ऑफ डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

 

कार्यशाला ने बीआईएस, शिक्षा जगत और पेशेवर हितधारकों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। तकनीकी सत्र और ओपन-हाउस संवाद में समकालीन निर्माण पद्धतियों, अग्नि एवं जीवन सुरक्षा, मानकीकरण और संस्थागत सहभागिता के संदर्भ में एनबीसीएस 2026 की प्रासंगिकता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

 

यह पहल अवसंरचना विकास से जुड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में अपनी बहु-विषयक शैक्षणिक और अनुसंधान विशेषज्ञता के माध्यम से योगदान देने तथा मानकों के प्रति व्यापक जागरूकता और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बीआईएस के साथ सहयोग को सुदृढ़ करने के प्रति आईआईटी रुड़की की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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