नेपाल आपदा में शांतिकुंज बना मदद का सहारा, प्रभावित परिवारों तक पहुंच रही राहत
हरिद्वार 3 सितंबर। नेपाल में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों के बीच राहत और सेवा का सिलसिला जारी है। विपदा की इस घड़ी में गायत्री तीर्थ शांतिकुंज ने मानवीय संवेदना के साथ मदद का हाथ बढ़ाया है। अखिल विश्व गायत्री परिवार की आपदा राहत टीम प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर जरूरतमंद परिवारों को आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध करा रही है। राहत के साथ कार्यकर्ता पीड़ितों को यह भरोसा भी दे रहे हैं कि संकट की इस घड़ी में अखिल विश्व गायत्री परिवार उनके साथ खड़ा है।
 
आपदा के बाद अनेक परिवारों के सामने भोजन, दैनिक उपयोग की सामग्री और सुरक्षित जीवन की चुनौती खड़ी हुई है। ऐसे समय में शांतिकुंज की टीम स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप राहत कार्यों को आगे बढ़ा रही है। नेपाल में गायत्री परिवार से जुड़े कार्यकर्ता भी प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं। शांतिकुंज परिवार अपने आराध्यदेव परमपूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के ‘पीड़ित मानवता की सेवा ही सच्ची साधना’ के संदेश को आधार मानकर सेवा कार्य में जुटा है।
अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रमुख श्रद्धेया शैलजीजी एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पंड्या नेपाल राहत दल के साथ लगातार संपर्क में हैं। अपने संदेश में डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि आपदा की घड़ी में पीड़ित मानवता के साथ खड़ा होना ही सच्ची मानवीय पहल है। प्रत्येक कार्यकर्ता करुणा और संवेदना के साथ जरूरतमंदों की सहायता के लिए तत्पर है। सेवा का मूल उद्देश्य केवल राहत सामग्री पहुंचाना नहीं, बल्कि संकट से जूझ रहे परिवारों को आत्मीयता और मानसिक संबल देना भी है।
शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार डॉ. चिन्मय पंड्या के मार्गदर्शन में राहत एवं सेवा अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है। शांतिकुंज आपदा राहत टीम के साथ 100 से अधिक स्वयंसेवक दिन-रात सेवा-सहयोग में जुटे हैं। टीम का मुख्य बेस कैंप काठमांडू में है, जबकि दूसरा कैंप विदुर, पीपलटार में बनाया गया है। यहां से प्रतिदिन करीब एक हजार प्रभावित लोगों के लिए भोजन आदि की व्यवस्था की जा रही है।
राहत कार्य में स्थानीय प्रशासन और सेना भी सहयोग कर रही है। उनके समन्वय से प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री और भोजन पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। शांतिकुंज की टीम स्थानीय जरूरतों का आकलन करते हुए आगे की राहत योजना तैयार करने में जुटी है।
शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण है: डॉ पण्ड्या
नवप्रवेशी विद्यार्थियों को देसंविवि के उपाध्यक्ष ने दिया संस्कारमय शिक्षा का संदेश
हरिद्वार 3 सितंबर। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के उन्नयन एवं व्यक्तित्व विकास के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ चिन्मय पण्ड्या एवं गायत्री विद्यापीठ व्यवस्था मण्डल प्रमुख श्रीमती शेफाली पण्ड्या ने दीप प्रज्वलन कर किया।
इस अवसर पर विवि के उपाध्यक्ष आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ दिशा देना है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति, सेवा और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। यहां से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी ज्ञानवान होने के साथ संवेदनशील, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक बने, यही विश्वविद्यालय की मूल भावना है। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने, निरंतर सीखने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में गायत्री विद्यापीठ व्यवस्था मण्डल प्रमुख श्रीमती शेफाली पण्ड्या ने कहा कि विश्वविद्यालय का वातावरण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल है। विद्यार्थियों को यहां मिलने वाले अवसरों का सदुपयोग करते हुए अपने व्यक्तित्व को निखारना चाहिए।
इस दौरान कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं, अनुशासन, संस्कारमय जीवन एवं विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से परिचित कराया गया। इस अवसर पर विवि के कुलसचिव श्री बलदाउ देवांगन सहित संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष एवं समस्त शिक्षक एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।



