सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सेक्टर-2, भेल, रानीपुर, हरिद्वार में वार्षिक निरीक्षण कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया
हरिद्वार सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सेक्टर-2, भेल, रानीपुर, हरिद्वार में वार्षिक निरीक्षण कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षा, संस्कार, अनुशासन एवं विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों एवं विभागों का निरीक्षण किया गया।
 
कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री दिनेश जी, प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज; श्री लक्ष्मण सिंह जी, प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर, ऊखीमठ; श्री नवीन जी, प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, जसपुर; तथा श्री उमराव जी, पूर्व प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सितारगंज उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त स्थानीय शिक्षकों में श्रीमती अंजना लखारिया, प्रवक्ता रसायन विज्ञान, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, ज्वालापुर; श्रीमती शोभा कठैत, प्रवक्ता अंग्रेजी; श्रीमती ममता राणा; श्री अनुपम जी, प्रवक्ता भौतिक विज्ञान; श्रीमती प्रीति यादव, प्रवक्ता गणित; एवं श्री संतोष मेहता, प्रवक्ता वाणिज्य सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों एवं शिक्षकों द्वारा माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन एवं सामूहिक सरस्वती वंदना के साथ किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त अंथवाल जी ने सभी आगंतुक अतिथियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने सभी अतिथियों को पटका पहनाकर सम्मानित किया तथा विद्यालय में पधारने के लिए आभार व्यक्त किया।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में श्री नवीन जी, प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, जसपुर ने विद्यार्थियों को अध्ययन में सुधार लाने के लिए अनेक उपयोगी सुझाव एवं प्रभावी शैक्षणिक प्रयोग बताए। उन्होंने नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन, एकाग्रता, आत्मअनुशासन तथा निरंतर अभ्यास को सफलता का आधार बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानकर लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी।
इसके पश्चात श्री उमराव जी, पूर्व प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सितारगंज ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए अध्ययन से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान, चरित्र, व्यवहार और जीवन मूल्यों का विकास करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासु बनने, नियमित स्वाध्याय करने, शिक्षकों का सम्मान करने तथा अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।
निरीक्षण के अंतिम चरण में अतिथियों द्वारा छात्र संसद एवं कन्या भारती की बैठकों में सहभागिता की गई। इस दौरान विद्यार्थियों के नेतृत्व कौशल, संगठन क्षमता, उत्तरदायित्व बोध एवं विद्यालय की गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका की समीक्षा की गई। इसके साथ ही विद्यालय के विभिन्न विभागों एवं शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन कर उनकी कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। अतिथियों ने आवश्यक सुझाव देते हुए विद्यालय की व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने पर बल दिया।
श्री नवीन जी एवं श्री उमराव जी ने अपने अनुभवों के आधार पर विद्यालय के शैक्षिक वातावरण, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, शिक्षकों की सक्रिय भूमिका तथा भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों के समन्वय से शिक्षा को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने विद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए निरंतर नवाचार एवं सकारात्मक परिवर्तन की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
समग्र रूप से वार्षिक निरीक्षण कार्यक्रम अत्यंत प्रेरणादायी, ज्ञानवर्धक एवं मार्गदर्शक रहा। इस आयोजन से विद्यालय को अपनी उपलब्धियों का मूल्यांकन करने तथा भविष्य में शैक्षिक एवं सह-शैक्षिक गतिविधियों को और अधिक उत्कृष्ट बनाने की दिशा में नई प्रेरणा प्राप्त हुई।
अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त अंथवाल जी ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित शिक्षकों का हृदय से आभार व्यक्त किया तथा उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन एवं सुझावों के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।



