निर्मल जल के समान जीवन व्यतीत करने वाले ब्रह्मलीन महंत सुरेंद्र मुनि महान संत थे। उनके ब्रह्मलीन होने से समाज को अपूर्णीय क्षति हुई है:- हरीश रावत पूर्व मुख्यंमत्री

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प्रमोद कुमार हरिद्वार 

मनोज ठाकुर,हरिद्वार 3 फरवरी। कनखल स्थित श्री अवधूत जगतराम उदासीन आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर महंत सुरेंद्र मुनि शनिवार को ब्रह्मलीन हो गए। 90 वर्षीय वयोवृद्ध संत महंत सुरेंद्र मुनि लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज में शोक की लहर है। संत समाज की उपस्थिति में ब्रह्मलीन महंत सुरेंद्र मुनि का आश्रम में अंतिम संस्कार किया गया। उनके शिष्य स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि ने उन्हें मुखाग्नि दी। इससे पूर्व शंकराचार्य चैक से सन्यास मार्ग होते हुए जगतराम उदासीन आश्रम तक अंतिम यात्रा निकाली गयी। जिसमें सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूष व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी शामिल हुए। हरीश रावत ने ब्रह्मलीन महंत सुरेंद्र मुनि को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि निर्मल जल के समान जीवन व्यतीत करने वाले ब्रह्मलीन महंत सुरेंद्र मुनि महान संत थे। उनके ब्रह्मलीन होने से समाज को अपूर्णीय क्षति हुई है। सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलते मानव कल्याण में योगदान करना चाहिए। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि वयोवृद्ध संत महंत सुरेंद्र मुनि महाराज संत समाज के प्रेरणा स्रोत थे। उनके ब्रह्मलीन होने से हुई क्षति को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए सभी को धर्म संस्कृति के संरक्षण संवर्द्धन में योगदान करना चाहिए। श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के मुखिया महंत भगतराम महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत सुरेंद्र मुनि सरल व मधुरभाषी संत थे। धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार और अखाड़े को आगे बढ़ाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। पूर्व पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, स्वामी रविदेव शास्त्री, कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज व गौ गंगा धाम सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी निर्मल दास महाराज ने कहा कि समाज को ज्ञान की प्रेरणा देकर अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर करने वाले ब्रह्मलीन महंत सुरेंद्र मुनि महाराज विलक्षण संत थे। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए धर्म संस्कृति के संरक्षण व मानव कल्याण में योगदान का संकल्प ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। इस दौरान श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह, स्वामी हरिचेतनानंद, स्वामी दिनेश दास, महंत विष्णुदास, महंत प्रेमदास, महंत सूर्यमोहन गिरी, महंत रघुवीर दास, सतपाल ब्रह्मचारी, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत मोहन सिंह, महंत जगजीत सिंह, महंत तीरथ सिंह, महंत गंगादास, स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती, महंत गोविंद दास, महंत जयेंद्र मुनि, स्वामी शिवानंद, महंत राघवेंद्र दास, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, महंत हरिदास, महंत निर्भय सिंह, महंत दुर्गादास, बाबा हठयोगी सहित बड़ी संख्या में संत व श्रद्धालुजन मौजूद रहे।

 

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