गुरुजनों की पावन स्मृति मनुष्य के भाग्य का उदय करती है श्री महंत विष्णु दास महाराज
सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार श्रवण नाथ नगर स्थित श्री रघुवीर भवन आश्रम में परम पूज्य गुरुदेव साकेतवासी श्री 108 महंत दयाराम दास महाराज की नवम पावन पुण्यतिथि तथा श्री लालचन्द मनचन्दा की पावन स्मृति में श्री सुनील मनचन्दा तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीनाक्षी ने विशाल भंडारे का आयोजन किया इस अवसर पर हुए विशाल संत समागम में बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाई गई इस अवसर पर आयोजित विशाल संत समागम को संबोधित करते हुए श्री रघुवीर भवन आश्रम के महंत प्रमोद दास महाराज ने कहा परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री महंत दयाराम दास महाराज इस पृथ्वी लोक पर साक्षात ज्ञान की त्रिवेणी थे उनका पावन सानिध्य भक्तों के जीवन का उद्धार किया करता था उनके ज्ञान का प्रताप सुख समृद्धि शांति तथा वैभव के रूप में आज भी आश्रम में तथा भक्तजनों के बीच विद्यमान है इस अवसर पर बोलते हुए गुरु सेवक निवास उछाली आश्रम श्री महंत विष्णु दास महाराज ने कहा गुरु जनों की पावन स्मृति भक्तजनों के भाग्य का उदय करती है सतगुरु इस पृथ्वी लोक पर भक्त जनों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें ज्ञान रूपी गंगा में स्नान करा कर उनके जीवन का उद्धार कर देते हैं एवं धर्म कर्म के माध्यम से भक्तों को उंगली पड़कर भगवान राम की शरण में ले जाते हैं हमारे धर्म ग्रंथों के अध्ययन में मनुष्य जीवन के कल्याण की युक्ति छुपी हुई है धर्म ग्रंथो का ज्ञान हमें पावन सतगुरु के श्री चरणों से प्राप्त होता है श्री महंत बाबा हट योगी महाराज ने कहा सतगुरु वह पावन गंगा की धार है जिनके ज्ञान रूपी अमृत सरोवर में स्नान करने के बाद भक्तों का लोक एवम परलोक दोनों सुधर जाते हैं श्री महंत प्रेमदास महाराज ने कहा सतगुरु इस पृथ्वी लोक पर सत्य की वह डगर है जिस पर चलने मात्र से भक्तों का लोक एवंम परलोक दोनों सुधर जाते हैं सतगुरु का पावन सानिध्य बताया गया मार्ग हमारे भाग्य का उदय कर देता है इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत दुर्गा दास महाराज ने कहा जो भक्त सतगुरु के बतायें मार्ग पर चलते हैं उनके जीवन में धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती उन्हें यश कीर्ति वैभव के साथ-साथ उनके पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है सतगुरु का पावन सानिध्य हमारे भाग्य को गौरवान्वित करता है सतगुरु नाम जहाज है चढ़े सो उत्तरे पार सतगुरु की शरण में जो गया उसका लोक परलोक तो सुधर ही गया वह भवसागर पार हो गया इस अवसर पर बोलते हुए महंत प्रहलाद दास महाराज ने कहा परम पूज्य गुरुदेव श्री महंत दयाराम दास जी महाराज इस पृथ्वी लोक पर गंगासागर के सामान थे कहते हैं सारे तीरथ बार-बार गंगासागर एक बार जो ऐसे पावन गुरु की शरण में गया उसके जीवन का उद्धार हो गया इस अवसर पर सर्वश्री महंत नारायण दास पटवारी महंत सूरज दास महाराज महंत मुरारी शरण महाराज महंत जगदीश दास महाराज महंत दिनेश दास महाराज महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज महंत रवि देव महाराज सचिव महंत गोविंद दास महाराज महामंडलेश्वर कपिल मुनि महाराज महंत साध्वी गंगादास महाराज महंत प्रेमदास महाराज महंत कोठारी राघवेंद्र दास महाराज महंत जगजीत सिंह महाराज महंत दुर्गादास महाराज महंत केशवानंद महाराज महंत मस्त गिरी महाराज महंत प्रहलाद दास महाराज महंत तीरथ सिंह महाराज महंत रितेश दास महाराज महंत हितेश दास महाराज महंत शत्रुघ्न दास महाराज महंत परमेश्वर दास महाराज महंत कृष्ण मुनि महाराज स्वामी पुनीत दास महाराज महंत ज्ञान दास महाराज महंत धनेश्वर दास महाराज स्वामी हेमंत कश्यप महाराज स्वामी शंभू दास महाराज स्वामी हृदय दास महाराज महंत आचार्य प्रमोद शास्त्री महाराज महंत शुक्र गिरी महाराज महंत शांति प्रकाश महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज कोतवाल रमेशानन्द देहरादून बाबा कोतवाल धर्मदास महाराज परवीन कश्यप ठाकुर मनोजानंद सहित भारी संख्या में अनेकों आश्रम मठ मंदिरों से आये संत महापुरुष उपस्थित थे।
 

