13 August 2026

गोल्जयू संदेश यात्रा की अटल बिहारी गेस्ट हाउस में योजना बैठक संपन्न

विज्ञापन

 

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद यात्रा को लेकर अटल बिहारी गेस्ट हाउस हरिद्वार मे योजना बैठक संपन्न हुई इस अवसर पर गोल्जयू जीव देवता की महिमा का के बारे में जानकारी देते हए श्री विजय भट्ट ने बतायादेवभूमि उत्तराखंड के ऊंचे पर्वतों और घने बांज-बुरांश के जंगलों के बीच एक ऐसी शक्ति वास करती है, जिसे भक्त प्यार से ‘गोल्जयु’ और श्रद्धा से ‘न्याय का देवता’ कहते हैं। कुमाऊं की लोक संस्कृति में रचे-बसे गोलू देवता केवल एक लोक देवता नहीं, बल्कि जन-मानस के रक्षक और मार्गदर्शक हैं। सफेद घोड़े पर सवार, हाथ में धनुष-बाण लिए और सिर पर पगड़ी सजाए गोल्जयु का स्वरूप देखते ही मन में सुरक्षा का भाव जग जाता है। उनकी महिमा का सबसे अनूठा रूप अल्मोड़ा के चितई और नैनीताल के घोड़ाखाल जैसे मंदिरों में देखने को मिलता है, जहाँ का कोना-कोना पीतल की हजारों घंटियों से गुंजायमान रहता है। ये घंटियाँ उन भक्तों की कृतज्ञता हैं, जिनकी पुकार गोल्जयु ने सुनी और जिन्हें न्याय दिलाया।कहा जाता है कि जब संसार के सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं और कहीं से न्याय की उम्मीद नहीं बचती, तब इंसान गोल्जयु की शरण में जाता है। यहाँ की न्याय व्यवस्था कागजी नहीं, बल्कि आत्मिक है। भक्त अपनी पीड़ा और अपनी फरियाद सादे कागज या स्टाम्प पेपर पर लिखकर मंदिर की दीवारों पर टांग देते हैं। गोल्जयू यात्रा न्यासा संस्था के माध्यम से शुरू हो रही है इस बारे में श्री उज्ज्वल पंडित जी ने बतायायह दुनिया की इकलौती ऐसी कचहरी है, जहाँ न वकील की जरूरत है, न किसी गवाह की—यहाँ बस विश्वास की एक अर्जी ही काफी है। माना जाता है कि गोल्जयु अपने भक्तों की चिट्ठियां स्वयं पढ़ते हैं और उनके दुखों का निवारण करते हैं।

 

गोल्जयु की यात्रा और उनके ‘जागर’ का दृश्य तो और भी दिव्य होता है। जब ढोल-दमोह की थाप पर जागरिया (गायक) उनके जन्म और वीरता की गाथा गाता है, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। उनकी डोली यात्रा के समय पूरा गांव उमड़ पड़ता है। सफेद वस्त्रों और फूलों से सजी उनकी डोली जब पहाड़ियों के टेढ़े-मेढ़े रास्तों से गुजरती है, तो ऐसा लगता है मानो देवता स्वयं अपनी प्रजा का हाल जानने निकले हों। भक्त उनके दर्शन मात्र से धन्य हो जाते हैं और ‘जय गोल्जयु’ के जयकारों से पूरी घाटी गूंज उठती है।

चंपावत के राजमहल से शुरू हुई उनकी यह यात्रा आज हर कुमाऊंनी हृदय के केंद्र में है। वे सत्य के रक्षक हैं और अन्याय के काल। उनकी महिमा का सार यही है कि जो कोई भी सच्चे मन से और निस्वार्थ भाव से उनके चरणों में शीश झुकाता है, गोल्जयु उसे कभी खाली हाथ नहीं लौटने देते। वे उत्तराखंड की अस्मिता, न्याय के प्रतीक और पहाड़ की अडिग आस्था के साक्षात स्वरूप हैं। इस अवसर पर कार्य कर्म संयोजक डॉ नवीन पंत सहित अनेको लोग उपस्थित थे

विज्ञापन
Copyright © All rights reserved. | Sakshar Haridwar Powered by www.WizInfotech.com.