3 October 2026

अडोल आश्रम में विशाल भजन-सत्संग एवं संत महापुरुषों के भव्य भंडारे का आयोजन

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प्रमोद कुमार

हरिद्वार अडोल आश्रम में विशाल भजन-सत्संग एवं संत महापुरुषों के भव्य भंडारे का आयोजनहरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद भूपतवाला स्थित पावन अडोल आश्रम में आज परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री १००८ नित्यानंद पुरी जी महाराज की पतित-पावन कृपा से विशाल भजन-सत्संग चौकी कार्यक्रम एवं हजारों संत महापुरुषों के भव्य भंडारे का दिव्य आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। आश्रम परिसर प्रातःकाल से ही भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा, जहाँ भजन, कीर्तन और प्रभु श्रीराम के जयघोष से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं, संतों और भक्तों ने इस पुण्य अवसर पर उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।इस पावन अवसर पर अपने अमृतमय वचनों से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रातःस्मरणीय महंत दुर्गा दास जी महाराज ने कहा कि जिनके हृदय में भगवान श्रीराम का वास होता है, जिनके मन में सच्ची आस्था और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव रहता है, उनका जीवन सदैव मंगलमय और कल्याणकारी होता है। उन्होंने श्रीरामचरितमानस के सुंदर दोहों का उल्लेख करते हुए कहा—

 

“रामहि केवल प्रेम पियारा, जानि लेहु जो जाननिहारा।”

अर्थात प्रभु श्रीराम को केवल निष्कपट प्रेम ही प्रिय है। सच्चे भाव से की गई भक्ति मनुष्य के लोक और परलोक दोनों को सुधार देती है।कार्यक्रम में प्रबंधक एवं व्यवस्थापक श्री विनोद शर्मा जी महाराज ने अपने पूज्य गुरुदेव की अनंत कृपा, दिव्य संरक्षण और आध्यात्मिक महिमा पर अत्यंत प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु कृपा के बिना जीवन का अंधकार दूर नहीं हो सकता और गुरु ही जीव को ईश्वर से जोड़ने वाले सेतु होते हैं। वहीं महंत श्री प्रह्लाद दास जी महाराज ने भगवान श्रीराम की अनंत महिमा का वर्णन करते हुए भावपूर्ण दोहों एवं आध्यात्मिक प्रसंगों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।श्री हरीश कुमार गुलाटी जी ने भी ईश्वर भक्ति, सदाचार और सेवा के महत्व पर अपने सुंदर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि मानव सेवा, संत सम्मान और करुणा के भाव में भी ईश्वर का साक्षात निवास होता है। विशाल भंडारे में हजारों संत महापुरुषों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य अनुभव किया। संपूर्ण आयोजन भक्तिमय वातावरण, अनुशासित व्यवस्था और दिव्य आध्यात्मिक गरिमा का अद्भुत उदाहरण बना, जिसने हर उपस्थित श्रद्धालु के हृदय में भक्ति और श्रद्धा का नया प्रकाश प्रज्वलित कर दिया।

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