किसान-मजदूरों की आवाज बुलंद: MSP की कानूनी गारंटी से लेकर कर्जमाफी तक 14 सूत्रीय मांगपत्र राष्ट्रपति को भेजा

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संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार। किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन एवं चिंतन शिविर में देशभर से पहुंचे किसान-मजदूर प्रतिनिधियों ने किसानों और श्रमिकों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार के नाम एक 14 सूत्रीय मांगपत्र महामहिम राष्ट्रपति को प्रेषित किया। दो दिवसीय अधिवेशन में किसानों की आय, कृषि लागत, कर्ज, प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान तथा मजदूरों के रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम मजदूरी जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई।

 

मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विकास प्रधान ने कहा कि देश का किसान और मजदूर आज आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है जबकि मजदूर वर्ग महंगाई और बेरोजगारी की दोहरी मार झेल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सभी कृषि उत्पादों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसानों के लिए व्यापक कर्जमाफी नीति समय की मांग है।प्रदेश प्रभारी अमित बंसल ने कहा कि सरकार को किसान और मजदूर संगठनों के साथ नियमित संवाद स्थापित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समयबद्ध मुआवजा, सस्ती बिजली, खाद-बीज पर सब्सिडी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए

प्रदेश अध्यक्ष सोलर चौधरी ने कहा कि कृषि और श्रम क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि किसान और मजदूर मजबूत होंगे तो देश स्वतः आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनेगा। उन्होंने मनरेगा के कार्य दिवस बढ़ाने, मजदूरी दरों में वृद्धि करने तथा भूमिहीन किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएं लागू करने की मांग की।

महिला प्रदेश अध्यक्ष अंजुम पठान ने कहा कि किसान और मजदूर परिवारों की महिलाओं को भी सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने मजदूरों के लिए स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, दुर्घटना बीमा तथा किसानों और मजदूरों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं छात्रवृत्ति योजनाओं के विस्तार की मांग उठाई।

अधिवेशन में पारित ज्ञापन में किसानों को कानूनी एमएसपी, कर्ज राहत, प्राकृतिक आपदा मुआवजा, कृषि लागत पर नियंत्रण, सस्ती बिजली, भूमिहीन किसानों के लिए योजनाएं, मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा, समान कार्य के लिए समान वेतन, मनरेगा विस्तार, शिक्षा एवं छात्रवृत्ति, भूमि अधिग्रहण पर उचित मुआवजा तथा वृद्ध किसानों एवं मजदूरों के लिए सम्मानजनक पेंशन जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।

मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि देश का किसान अन्नदाता और मजदूर राष्ट्र निर्माण का आधार स्तंभ है। सरकार को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए, जिससे भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को गति मिल सके।

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