20 August 2026

ज्वालापुर की सियासत में भूचाल, पूर्व भाजपा नेत्री उर्मिला सनावर की पोस्टरबाजी से बढ़ी अटकलें

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*”महिला, दलित और शोषित की आवाज बनूंगी” – उर्मिला सनावर*

*पोस्टरों से गायब हुआ कमल, निर्दलीय की चर्चा तेज*

 

*हरिद्वार,विधानसभा 27 ज्वालापुर* में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी पारा भी चढ़ता जा रहा है। भाजपा की पूर्व सक्रिय नेत्री और ज्वालापुर की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता *उर्मिला सनावर* ने अचानक पोस्टरबाजी कर पूरे क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

*रक्षाबंधन के बहाने शक्ति प्रदर्शन*

बहादराबाद से लेकर ज्वालापुर के हर चौराहे, गली-मोहल्ले और मुख्य मार्गों पर रक्षाबंधन की शुभकामनाओं वाले बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। सबसे खास बात यह कि सनावर खुद कार्यकर्ताओं के साथ सड़कों पर उतरकर पोस्टर चिपकाती नजर आईं।

*पोस्टरों में क्या खास? भाजपा का नाम-निशान गायब*

इस पोस्टरबाजी में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि *इन पोस्टरों में भाजपा का नाम, चुनाव चिह्न “कमल” और किसी भी पद का उल्लेख तक नहीं है।*

इसके बजाय पोस्टरों में *संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज, संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम* की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई गई हैं। राजनीतिक जानकार इसे सीधे तौर पर *दलित, पिछड़ा और युवा वोट बैंक* को साधने की कोशिश मान रहे हैं।

*क्या लड़ेंगी निर्दलीय चुनाव? दिया बड़ा संकेत*

सूत्रों की मानें तो पोस्टरबाजी के जरिए उर्मिला सनावर ने अपने *अगले सियासी कदम के संकेत* दे दिए हैं। चर्चा है कि वह *निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में* ज्वालापुर से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं।

हालांकि इस बीच उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि *”यदि पार्टी मुझे आधिकारिक प्रत्याशी बनाती है तो मैं इस सीट को पार्टी की झोली में डालने का काम करूंगी।”*

*एजेंडा तय: महिला, दलित और अंकिता प्रकरण*

सनावर ने अपने बयान में कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि *महिलाओं, दलित समाज और शोषित वर्ग के मुद्दों* को विधानसभा में मजबूती से उठाना है।

वह *अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी एंगल* पर अपनी बेबाक आवाज उठाने के कारण पहले भी सुर्खियों में रही हैं। इसी मुद्दे पर उन्होंने कई बार सरकार और प्रशासन से सवाल भी किए थे।

*ज्वालापुर के समीकरणों पर पड़ेगा असर?*

उर्मिला सनावर की इस सक्रियता से ज्वालापुर की सियासत में खलबली मच गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही खेमों में इसको लेकर मंथन शुरू हो गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सनावर निर्दलीय चुनाव लड़ती हैं तो *महिला और दलित वोटों का बड़ा हिस्सा* उनके खाते में जा सकता है, जिससे मुख्य दलों के समीकरण बिगड़ सकते हैं।

फिलहाल पोस्टरबाजी से यह तय है कि *ज्वालापुर विधानसभा में मुकाबला अब और दिलचस्प होने वाला है।*

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