जवानी अंधी बुढ़ापा लंगड़ा और इन्हीं के बीच ज्ञान सारस्वत होता है हरि भजन कल्याणकारी उद्धार करने वाला श्री महंत प्रहलाद दास महाराज
सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद) रानी गली स्थित गुरु कृपा कुटी में भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए आश्रम के श्री महंत प्रहलाद दास जी महाराज ने कहा मनुष्य की जवानी अंधी होती है और बुढ़ापा लंगड़ा होता है इसी के बीच प्राप्त होने वाला ज्ञान सारस्वत होता है जो मनुष्य समय रहते ज्ञान का सृजन कर लेता है उसका मानव जीवन सार्थक हो जाता है क्योंकि जवानी में मनुष्य तेरा मेरा इसका इसका और जीवन को संवारने में लगा रहता है और बुढ़ापे में टांगे लड़खड़ाने लगती है तो इसलिये ज्ञान संवर्धन और हरि भजन की कोई आयु निर्धारित नहीं है यह आपको समय मिलते ही उसका अर्जन करना चाहिए बुद्धि का सदुपयोग करना चाहिए और अपने भगवान राम के भजन में लीन होकर इस मानव जीवन को सार्थक कर लेना चाहिये क्योंकि जिस बुढ़ापे में आप हरि भजन की राम भजन की सोचते हैं उस समय आपका जीवन खुद दूसरों के अधीन हो जाता है आप खुद ठीक से खड़े नहीं हो सकते तो स्वस्थ भजन क्या करेंगे इसलिए जब भी समय मिले राम का नाम भजो यही आपके जीवन को सार्थकता प्रदान करेगा
 

