होली के रंग हमें एकता एवम अखण्डता के सूत्र में बांधते हैं सतगुरु उंगली पड़कर भवसागर पार कराते हैं महंत ज्ञानानन्द महाराज
सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) श्री राम निकेतन आश्रम भूपत वाला में भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से होली के पावन पर्व पर उद्गार व्यक्त करते हुए श्री महंत ज्ञानानन्द महाराज ने कहा होली के पावन रंगों की बौछार हमारे जीवन में एकता एकता का संदेश देते हुए हमें एकता के सूत्र में बंध कर रहने का संदेश देते हैं साथ ही होली आपसी सद भावना भाईचारे का प्रतीक है अगर जीवन में उदाहरण लेना है तो होली के रंगों से लो जब हम होली के पावन पर्व पर एक दूसरे को रंग गुलाल लगाते हैं तो हमारे बीच जो दूरियां मत भेद चले आ रहे थे वे सब दूर हो जाते हैं आपस में गले मिलते हैं और भाईचारे से होली का पर्व मनाते हैं बुराई का अंत आपने रावण और भगवान श्री राम के बीच हुए युद्ध में महाबली रावण का अंत अहंकार और झूठे घमंड के चक्कर में हुआ और उसका कुल सहित अंत हुआ इसी प्रकार अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लियें भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया और हिरणकश्यपू के आतंक का अंत किया भक्त प्रहलाद को अग्नि में जलाने की नीयत से होलीका ने अग्नि में प्रवेश किया किंतु उसका अंत हुआ और भक्त प्रहलाद की रक्षा हुई हमेशा बुराई पर अच्छाई ने अंत में जीत पाई है सच्चाई को सिद्ध करने में थोड़ा समय लगता है लेकिन सच्चाई कभी हारती नहीं युगों बाद भी एक दिन सच्चाई सामने आ ही जाती है इस पृथ्वी लोक पर सतगुरु हमारे सच्चे मार्गदर्शक होते हैं जो धर्म-कर्म यज्ञ अनुष्ठान पूजा पाठ के माध्यम से हमें कल्याण की ओर अग्रसर करते हैं और उंगली पड़कर भवसागर पार कराते है जिन लोगों को सतगुरु का सानिध्य मिलता है वे लोग बड़े ही भाग्यशाली होते हैं।
 

