देश के कई राज्यों में बाढ़ आने से शहर गांव बर्बाद हो चुके हैं कई लोग अपने परिवार को गंवा बैठे हैं-गीताराम जायसवाल

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सम्पादक प्रमोद कुमार
देहरादून भीम आर्मी एकता मिशन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष गीता राम जायसवाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि पंजाब राज्य को लेकर अन्य के राज्यों में बाढ़ से बहुत बुरी हालत हो गई है लोगों की और वहां पर बहुत ज्यादा संख्या में लोग अपनी जान भी गवा बैठे हैं और न जाने कितने पशु भी अपनी जान गवा बैठे हैं और वहां पर किसानों की खेती पूरी तरीके से बर्बाद हो चुकी है आज इस परिस्थिति में वहां के लोगों को मदद की आवश्यकता है भीम आर्मी एकता मिशन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि जिस तरीके से मुसलमान भाई लोग अपनी मस्जिद में से रुपया इकट्ठा करके पंजाब जम्मू कश्मीर में अन्य जगह पर पीड़ितों की मदद कर रहे हैं क्या भारत में इतने बड़े-बड़े मंदिर हैं और कथावाचक है जो अपने आप को जगतगुरु और भगवान से सीधे बात करने की बात करते हैं क्या आज वे लोग हम जनता कर दिए हुए दान से जो करोड़ और अरबो रुपया मंदिर में इकट्ठा किया जाता है उस रुपए में से कुछ हिस्सा निकालकर पंजाब एवं अन्य जगह जहां पर बाढ़ से लोग पीड़ित है जिन्होंने अपने परिवार खेत खलियान और जानवर भी गवा दिए हैं क्या उन लोगों की मदद मंदिर में जमा हुए धन से नहीं की जा सकती क्या मंदिर में बैठे महंत और कथावाचक जो एक कथा कहने के 10 15 20 25 लख रुपए लेते हैं क्या वह कथा वाचक उस पैसे से लोगों की मदद नहीं कर सकते क्या उनके अंदर इंसानियत नहीं है अगर इंसानियत ही नहीं है उनके अंदर तो हिंदू धर्म को बचाने का ढोंग क्यों करते हैं इंसान चाहे किसी भी जाति में धर्म ले लेकिन इंसान इंसान होता है सभी इंसानों के अंदर एक ही आत्मा एक ही जैसा खून पाया जाता है मंदिरों में बैठे बड़े-बड़े महंत बाबा के पास मंदिरों में बैठ बड़े-बड़े पुजारी पंडितों के पास करोड़ और अरबो रुपया इकट्ठा हो जाता है उस पैसे से आज बाढ़ से प्रभावित हुए राज्यों में मदद करनी चाहिए और वहां पर जो मदद जा रही है वह अपनी मेहनत से कमाया हुआ धन इकट्ठा करके उन लोगों की मदद कर रहे हैं तो क्या मंदिर में बैठे पुजारी पंडित लोग ऐसी स्थिति में उन बाढ़ से पीड़ित प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मदद नहीं कर सकते जिनके पास करोड़ों अरबो रुपए इकट्ठा हो जाता है सिर्फ जनता का दिया हुआ दान है ना कि उनकी मेहनत से कमाया हुआ पैसा और सरकार को इन पैसे का भी हिसाब लेना चाहिए ताकि देश में हालत खराब होने पर जनता की मदद कर सके जैसे की अब देश के कई राज्यों में बाढ़ आने से शहर गांव बर्बाद हो चुके हैं कई लोग अपने परिवार को गंवा बैठे हैं अपने पशुओं को खो चुके हैं और उनकी खेती रोजगार सब बर्बाद हो चुका है तो ऐसे में मंदिरों में जमा हुआ पैसा ही सरकार को इन सभी राज्यों में मदद के लिए देना चाहिए मंदिर में करोड़ों रुपया जमा हो जाता है वह किस काम का है जब देश की जनता मर रही हो और वह पैसा कम नहीं आ रहा हो उसे पैसे से केवल मंदिर में बैठे पंडित पुजारी लोग अपने घर बनाते हैं और अपने बच्चों का पेट पलते हैं और अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर आई एस,पीसीएस,डॉक्टर इंजीनियर बना देते हैं लेकिन जनता के लिए वह उसे दान दिए हुए पैसे को दबा कर बैठ जाते हैं जो की जनता का ही दिया हुआ होता है और मैं कल एक अखबार में पढ़ रहा था कि मंदिर में बैठे पुजारी की सरकार ने सैलरी फिक्स कर दी है कि मंदिर में पूजा करने वाले पंडितों को पुजारी को सैलरी दी जाएगी जिसका वेतनमान लगभग 30 से 50 के बीच रखा है लेकिन देश के पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार अपने रोजगार के लिए भटक रहे हैं उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है सरकार को सर मनी चाहिए की पढ़े लिखे युवाओं को रोजगार देना चाहिए उनको सरकारी नौकरी देनी चाहिए लेकिन देश में अंधी सरकार बैठी है आंख बंद करके काम कर रही है जिनके पास लाखों रुपया करोड़ों रुपया दान में इकट्ठा हो जाता है जिसका कोई हिसाब किताब नहीं होता है उन्हें पुजारी की सरकार सैलरी और सरकारी कर्मचारियों की तरह सुविधा प्रदान करने की बात कर रही है विश्वनाथ मंदिर में यह सुविधा सरकार पुजारी को दे चुकी है यह है मैं नहीं अखबार कह रहा है

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