मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान के आव्हान पर एक अप्रैल से श्रम कानून लागू होने के विरोध में एक अप्रैल को “काला दिवस “मनाकर प्रदर्शन किया गया व काली पट्टीयां भी हाथ पर बाधी गयी
संपादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान के आव्हान पर एक अप्रैल से श्रम कानून लागू होने के विरोध में एक अप्रैल को “काला दिवस “मनाकर प्रदर्शन किया गया व काली पट्टीयां भी हाथ पर बाधी गयी ।हरिद्वार में इंकलाबी मजदूर केन्द्र व संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन से जुड़े सिडकुल की यूनियनें व प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा संयुक्त रुप से हरिद्वार के सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र के प्रवेश द्वार चिन्मय डीग्री कालेज चौक पर सुबह 6 बजे से जमकर नारेबाजी कर वक्ताओं ने केन्द्र सरकार के मजदूर विरोधी चरित्र को उजागर किया।
वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूरों को गुलाम बनाने व पूंजीपतियों को शोषण की खुली छूट के लिए वेतन संहिता 2019 और औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यवसायिक संरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संबंधी संहिता 2020 एवं सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 को आनन-फानन में दोनों सदनों से पास करा कर कानून बनाया। यह मजदूर वर्ग पर व्यापक हमला है। इन संहिताओं में ट्रेड यूनियन के अधिकारों को सीमित किया गया है, हड़ताल के अधिकार को कठिन बनाया गया है, स्थाई आदेश अधिनियम को 100 मजदूरों के स्थान पर 300 स्थाई मजदूर पर लागू करने की बात की गयी है। पूंजीपतियों को पहले कारखानों में 100 मजदूरों से कम होने पर बंदी की छूट थी अब इसे 300 मजदूरों की संख्या तक बढ़ा दिया है स्थाई रोजगार के स्थान पर एफटीई व नीम को पास करा कर ठेकेदारी प्रथा को मजबूत कर दिया गया है। ये चारों श्रम संहिताएं एक अप्रैल 2026 से व्यवहार में लागू हो रही है इसका विरोध पूरे भारत में हो रहा है।
काला दिवस मनाने व प्रदर्शन करने में इंकलाबी मजदूर संगठन के पंकज कुमार, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की नीता,संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन के संयोजक व फूड्स श्रमिक यूनियन आईटीसी के महामंत्री गोविन्द सिंह, आईटीसी मजदूर संघ के महामंत्री रवि चंदोला, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष राजकिशोर, कर्मचारी संघ सत्यम आटो के महिपाल, एवरेडी मजदूर यूनियन के महामंत्री अनिल कुमार, किर्बी श्रमिक कमेटी के प्रधान वाजिद, सिमेंस वर्कर्स यूनियन (सी एंड एस) के महिपाल,देव भूमि श्रमिक संगठन हिन्दूस्तान यूनिलीवर के ललित सिंह समेत दर्जनों मजदूर उपस्तिथ रहे।
 


