ईश्वर की इच्छा सर्वोपरि: मनुष्य मात्र एक माध्यमश्री महंत कमलेशानन्द सरस्वती महाराज,

विज्ञापन

संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद देश के प्रसिद्ध गंगा भक्ति आश्रम खड़खड़ी द्वारा दिये गये आध्यात्मिक संदेश में ईश्वर की सर्वोच्च सत्ता और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को गहराई से समझाया गया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि इस सृष्टि में जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह सब ईश्वर की इच्छा से ही संभव है। उनकी मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता, इसलिए मनुष्य को अपने अहंकार को त्यागकर यह स्वीकार करना चाहिए कि वह केवल एक माध्यम है, यह उद्गार प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री महंत कमलेशानन्द सरस्वती

 

महाराज ने व्यक्त करते हुए कहा कि संसार में होने वाले सभी कार्य—चाहे वे अच्छे हों या बुरे—अंततः ईश्वर की इच्छा के अधीन होते हैं। मनुष्य अक्सर अपने कर्मों का श्रेय स्वयं को देता है, लेकिन यह उसका भ्रम है। वास्तविकता यह है कि ईश्वर ही सबका संचालन कर रहे हैं और मनुष्य उनके द्वारा संचालित एक साधन मात्र है। यह समझ जीवन में विनम्रता और संतुलन लाती है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मनुष्य के पास अपने जीवन को सार्थक बनाने का अवसर अवश्य है। हरि नाम का स्मरण, भक्ति, सत्संग और ईश्वर की महिमा का गुणगान करके व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है। यही साधन उसे मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और अंततः मोक्ष की ओर ले जाते हैं।महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में आने वाले सुख-दुख को ईश्वर की इच्छा मानकर स्वीकार करना चाहिए और हर परिस्थिति में उनका स्मरण करते रहना चाहिए। यही सच्ची भक्ति है और यही जीवन को सफल बनाने का मार्ग भी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में धर्म, आस्था और भक्ति को अपनाएं, ताकि उनका जीवन न केवल स्वयं के लिए बल्कि समाज के लिए भी कल्याणकारी बन सके।

विज्ञापन
Copyright © All rights reserved. | Sakshar Haridwar Powered by www.WizInfotech.com.