विश्व योगासन चैम्पियनशिप 2026 में भारत का दबदबा, डॉ. आरती पाल और पतंजलि विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने बढ़ाया देश का गौरव

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संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार 17 जून। भारतीय महिला टीम की कप्तान तथा पतंजलि विश्वविद्यालय की डॉ. आरती पाल ने, प्रथम विश्व योगासन चैम्पियनशिप 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। योग विषय में पीएचडी धारक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक उपलब्धियाँ हासिल कर चुकी डॉ. पाल ने अपने अनुभव, अनुशासन और उत्कृष्ट तकनीकी प्रदर्शन से भारतीय दल का सफल नेतृत्व किया। उनकी उपलब्धि योगासन को प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरणा मानी जा रही है।

 

4 से 8 जून 2026 अहमदाबाद में तक आयोजित इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में 79 देशों के 522 खिलाड़ियों ने भाग लिया। योगासन के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर विश्व चैम्पियनशिप का आयोजन हुआ, जिसका उद्देश्य योगासन को वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक खेल के रूप में स्थापित करना और भविष्य में ओलंपिक मान्यता की दिशा में आगे बढ़ाना था। इस प्रतिष्ठित आयोजन में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 114 पदक, जिनमें 102 स्वर्ण पदक शामिल हैं, जीतकर पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। विश्व चैम्पियनशिप ने योगासन को वैश्विक खेल के रूप में नई पहचान दी है।

पतंजलि विश्वविद्यालय की छात्रा इंदु मथुरिया ने भी विश्व चैम्पियनशिप में रिदमिक पेयर स्पर्धा में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ प्रतियोगिता में कुल दो स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, तथा संस्थान और देश का नाम रोशन किया। । उनकी सफलता ने युवा योगासन खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है । आधुनिक स्कोरिंग प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और उच्च स्तरीय आयोजन ने यह संकेत दिया है कि योगासन भविष्य में बड़े बहु-खेल आयोजनों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकता है। उनकी सफलता विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, अनुशासन और योगासन उत्कृष्टता का प्रमाण है।

विशेष उल्लेखनीय है कि पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार की डॉ. आरती पाल ने प्रथम विश्व योगासन चैम्पियनशिप में भारतीय महिला टीम की कप्तान के रूप में न केवल नेतृत्व किया, बल्कि सीनियर-ए वर्ग की ट्रेडिशनल एवं फॉरवर्ड बेंड स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। उनकी यह उपलब्धि भारतीय योगासन इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखी जा रही है। इससे पूर्व वे छह से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और प्रत्येक प्रतियोगिता में पदक अर्जित किया है। एशियन योगासन स्पोर्ट्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक सहित 26 से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनकी उपलब्धियाँ उन्हें देश की अग्रणी योगासन खिलाड़ियों में स्थापित करती हैं। डॉ. पाल भारत की पहली योगासन खिलाड़ी हैं जिन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार के लिए अनुशंसित किया गया। एक शिक्षाविद्, शोधकर्ता और खिलाड़ी के रूप में उन्होंने योगासन को मुख्यधारा के प्रतिस्पर्धात्मक खेल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पतंजलि विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक एवं समन्वयक के रूप में उनका योगदान विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल एवं शोध संस्कृति प्रदान कर रहा है।

पतंजलि विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय योग शिक्षा, अनुसंधान और खेल उत्कृष्टता का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है। विश्व योगासन चैम्पियनशिप 2026 में विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों की सफलता ने संस्थान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया है तथा भारत को योगासन की वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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