15 August 2026

श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े का 14वां महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह भव्यता के साथ हुआ संपन्न – संजीवन नाथ

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सम्पादक प्रमोद कुमार 

हरिद्वार, 14 अगस्त। कनखल स्थित मृत्युंजय मठ में श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा (रजि.) का 14वां महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह श्रद्धा, आस्था और संत परंपरा के गरिमामय वातावरण में बड़े ही धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

 

समारोह के दौरान दीपेंद्र नाथ ‘दीपक’ जी महाराज (जम्मू), विजय लक्ष्मी मोनिका जी महाराज (चंडीगढ़), अंजू जी महाराज (दिल्ली) एवं दीपांशु जी महाराज (अंबाला) को महामंडलेश्वर की उपाधि से विभूषित किया गया। संत समाज ने नव नियुक्त महामंडलेश्वरों को आशीर्वाद देते हुए सनातन धर्म, संत परंपरा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

अखाड़े के अध्यक्ष श्री संजीवन नाथ जी महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक केवल एक पदवी प्रदान करने का अवसर नहीं, बल्कि संत परंपरा की जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा सनातन संस्कृति, धर्म और मानव सेवा के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

महामंडलेश्वर हर्षिता जी महाराज ने कहा कि संत परंपरा का मूल उद्देश्य समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना और सनातन संस्कृति की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

महामंडलेश्वर श्री कृष्ण जी महाराज ने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या और लोककल्याण को समर्पित होता है। अखाड़े की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज में सेवा, सद्भाव और धर्म के संदेश को मजबूत किया जाएगा।

महामंडलेश्वर महंत डॉ. जोगेंद्र नाथ जी महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर की उपाधि के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। संत समाज को एकजुट होकर सनातन परंपराओं और राष्ट्रहित के कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए।

समारोह की मुख्य अतिथि श्री चेतना गिरी महाराज ने नव नियुक्त महामंडलेश्वरों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संतों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन सनातन संस्कृति की जड़ों को और मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर हर्षिता जी महाराज एवं महामंडलेश्वर श्री कृष्ण जी महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंत्रोच्चार, संतों के आशीर्वचन और धार्मिक वातावरण के बीच समारोह का समापन हुआ।

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