1 October 2026

सर्वोदय सत्संग समिति आश्रम में रहने को लेकर विवाद, कथा व्यास जयशंकर त्रिपाठी ने लगाए उत्पीड़न के आरोप

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हरिद्वार। भूपतवाला स्थित भारत माता मंदिर के निकट सर्वोदय सत्संग समिति आश्रम से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कथा व्यास एवं प्रयागराज निवासी जयशंकर त्रिपाठी ने आश्रम प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों पर अभद्र व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न तथा कुटिया खाली कराने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।

 

 

जयशंकर त्रिपाठी ने बताया कि लगभग दस वर्ष पूर्व वह कथा वाचन के सिलसिले में सर्वोदय सत्संग समिति आश्रम आए थे। उस दौरान आश्रम की व्यवस्था देख रही स्वर्गीय/पूर्व प्रबंधक (यदि लागू हो) श्रीमती सरला शर्मा के व्यवहार एवं स्नेह से प्रभावित होकर उनका मन हरिद्वार में बसने का हुआ। उनका कहना है कि प्रारंभिक बातचीत में उन्हें आश्रम परिसर में एक कक्ष निर्माण की योजना बताई गई थी, जिसके लिए लगभग आठ लाख रुपये का उल्लेख किया गया था। बाद में परिस्थितियां बदलने पर उन्हें बताया गया कि आश्रम में पहले से बने एक कमरे की मरम्मत कर उसे उनके उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके लिए उन्होंने लगभग चार वर्ष पूर्व दो लाख रुपये चेक के माध्यम से दिए।

 

त्रिपाठी का दावा है कि उस समय उन्हें यह आश्वासन दिया गया था कि वह अपनी धर्मपत्नी के साथ आजीवन आश्रम में रह सकेंगे। वर्तमान में उन्हें आश्रम की 20 नंबर कुटिया उपयोग के लिए दी गई थी। उनका कहना है कि वह वर्ष में केवल कुछ दिनों के लिए ही आश्रम आते हैं और सामान्यतः 8 से 10 दिन ही वहां प्रवास करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रवास के दौरान भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए वह अलग से भुगतान भी करते रहे हैं।

 

जयशंकर त्रिपाठी का आरोप है कि पिछले कुछ समय से आश्रम से जुड़े कुछ सदस्य एवं संबंधित लोग उन्हें कुटिया खाली करने के लिए कह रहे हैं तथा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी प्रकार अन्य लोगों से भी राशि लेकर आश्रम में रहने की व्यवस्था किए जाने की बातें सामने आई हैं।

 

त्रिपाठी ने मांग की है कि उन्हें और उनकी धर्मपत्नी को आश्रम में सम्मानपूर्वक रहने दिया जाए तथा उनके साथ किसी प्रकार की अभद्रता न की जाए। उनका कहना है कि उन्होंने हरिद्वार की पावन भूमि में जीवन के शेष समय को आध्यात्मिक वातावरण में बिताने की भावना से आश्रम से जुड़ाव बनाया था।

 

उल्लेखनीय है कि इस संबंध में आश्रम प्रबंधन अथवा अन्य संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। समाचार में प्रकाशित आरोप कथा व्यास जयशंकर त्रिपाठी द्वारा लगाए गए दावों पर आधारित हैं। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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