मनुष्य की शैक्षिक योग्यता सफलता और गुरुजनों से प्राप्त ज्ञान तुम्हारा परिचय दुनिया से करवाते है- अध्यक्ष संजीवन नाथ महाराज
सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज कुमार मनोजानन्द) गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े के अध्यक्ष श्री संजीव नाथ महाराज ने होली के पावन अवसर पर अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए कहा होली के रंग हमारे जीवन में खुशियों की दस्तक देते हैं जिस प्रकार होली के रंग की फुहार पिचकारियों से निकलती है इसी प्रकार यह त्यौहार हमारे जीवन में खुशियों के रंग भर देता हैं रिश्तेदारों से मिलन भाई दोस्तों से मिलन परिवार जनों से मिलन आदि अनेको उत्साहपूर्ण सुखद क्षण अति आनंदमयी सुखद होते हैं मनुष्य अपने मन में बसे द्वेष भाव को बुलाकर होली के रंग में रंग लगाकर एक दूसरे के गले मिलते हैं और रंगों के गुलाल उनके जीवन के मनमुटाव को दूर कर उन्हें सुखद एहसास कराते हैं होली के पावन पर्व पर सतगुरु देव भगवान के चरणों में यही प्रार्थना है आपके जीवन में भजन सिमरन सेवा का रंग निरंतर चढ़ा रहे रंग उत्सव के पावन पर्व की आपको एवं आपके प्रिय जनों को हृदय की गहराइयों से अनंत शुभकामनाये सदा दिवाली भक्त की बारह मांस बसंत भक्ति का रंग जिन पर चढ़े उनके रंग अनंत मनुष्य कभी-कभी कोई ईर्ष्या के वासी भूत होकर आपको गिरने वाले को यह पता नहीं होता कि आपकी वजह से ही वह खड़ा हुआ है सफलता तुम्हारा परिचय दुनिया से कराती है और बुद्धि ज्ञान आपको विश्व में सर्वोपरि बनाते हैं और जीवन में सफलता तुम्हें दुनिया से परिचय करवाती है यदि व्यक्ति इस बात की परवाह नहीं करें कि श्रेय किसे मिलता है तो वह और भी अच्छा कर सकता है और भी प्रबल बन सकता है क्योंकि बुद्धि ज्ञान और उसे ग्रहण करने की कोई क्षमता नहीं किंतु जिसके जीवन में जलन इर्षा स्थान ग्रहण कर लेती है उसका पतन और विनाश निकट होता है अहंकार जलन ईर्ष्या कि अगर शिक्षा लेनी है तो रावण और श्री राम से ले सकते हैं इतना बड़ा बलशाली ब्राह्मण कुल में जन्मे और त्रिलोक में अपने बल का डंका बजाने के बाद अपने अहंकार के वशीभूत होकर कुल सहित विनाश को प्राप्त हुआ अगर विनाश और अपना पतन नहीं चाहते हो तो अपने जीवन से अहंकार निंदा इर्षा जलन का त्याग करो नहीं तो तुम्हारा आने वाला समय अंधकार मय होगा अगर ईश्वर ने आपको धन दिया है तो उसका उपयोग अच्छे कार्यों पर करो बल दिया है तो दूसरे की सहायता के लियें करो और ज्ञान दिया है तो उसे दूसरों को शिक्षित बनाने संस्कारवान बनाने और समाज के कल्याण के मे उपयोग करो कुछ ऐसी ही विचारधारा लेकर गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा समाज के बीच समाज से पश्चात संस्कृति तथा बुराइयों को मिटाने के लियें और समाज को अच्छे संस्कार ग्रहण करने का संदेश देने हेतु आपके बीच आया है हमारे तपस्वी विद्वान संत तथा पदाधिकारी देश के कोने-कोने में जाकर भारतीय संस्कृति का आत्म बोध कराने का प्रयास करेगा साथ ही विदेशियों को भी भारतीय संस्कृति तथा इतिहास का गुणगान सुनायेगा समाज से नशाखोरी दहेज प्रथा सहित अनेको रुढीर वादी प्रथाओं को मिटाने हेतु कृत संकल्प है जीवन और मृत्यु इस सृष्टि का अटल सत्य है जो आया है उसे एक दिन जाना भी है तो कम से कम समाज के लियें देश के लिये कुछ ऐसा करके जाओ की सदियों तक उसकी मिसाल लोगों की जवान पर रहे और आप उनकी यादों में उनके विचारों में और उनके संस्कारों में हमेशा हमेशा जिंदा रहे और अमर रहे आपकी यश कीर्ति और समाज के प्रति दायित्वों की गाथा सदियों तक मनुष्य के स्मृति पटल पर बनी रहे
 

