बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर किया विशेष ध्यान,परमार्थ निकेतन में सनातन और बौद्ध परंपराओं का अद्भुत मिलन

विज्ञापन

*✨परमार्थ निकेतन में वैश्विक आध्यात्मिक संगम*

*💥बुद्ध पूर्णिमा पर करुणा और एकता का संदेश*

 

*🌺हांगकांग, सिंगापुर, बैंकाक से आये बौद्ध प्रतिनिधियों की पूज्य स्वामी जी से दिव्य भेंट*

*🌸बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर किया विशेष ध्यान*

*✨परमार्थ निकेतन में सनातन और बौद्ध परंपराओं का अद्भुत मिलन*

*🌸डिजिटल दुनिया में जुड़े रहते हुए भी अपने भीतर से जुड़ना सीखें*

*💥इंटरनेट के साथ “इनर-नेट” से भी जुड़ें*

*🙏🏻स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 1 मई। परमार्थ निकेतन में हांगकांग, सिंगापुर और बैंकाक से आए लामा, बौद्ध भिक्षु एवं बुद्धिस्ट छात्र दल ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से आत्मीय भेंट की। आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर करुणा, शांति और वैश्विक एकता का संदेश देते हुये कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश सीमाओं से परे मानवता को एक सूत्र में पिरोता है।

बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर आयोजित यह चिंतन संवाद, सनातन और बौद्ध परंपराओं के बीच उस गहन आध्यात्मिक सेतु का जीवंत अवसर है। जिसकी जड़ें अनादि काल से भारतीय संस्कृति में समाहित हैं।

बौद्ध लामा जी, जो बुद्धिस्ट छात्रों के दल को लेकर परमार्थ निकेतन आए हैं, विगत 36 वर्षों से इस पवित्र तीर्थ परमार्थ निकेतन में हर वर्ष 8 से 10 दिनों के लिए आकर ध्यान और साधना करते हैं। वे विश्व के अनेक देशों में सनातन धर्म के संदेश को आगे बढ़ा रहे हैं।

 

सनातन की यही दिव्य विशेषता है जो इसे जान लेता है, उसे अपने जीवन में उतार लेता है वह प्रसन्न व प्रपन्न हो जाता है। मां गंगा के इन पावन तटों पर आकर वे अपनी आंतरिक ऊर्जा को पुनः जागृत करते हैं, मानो जीवन की बैटरी को फिर से चार्ज कर रहे हों और नई चेतना, शांति और शक्ति प्राप्त कर रहे हों।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भगवान बुद्ध का मूल संदेश है जागरण। अपने भीतर जागो, करुणा को जियो, और सजगता को अपना पथ बनाओ। जब हम स्वंय शान्त होते है तब ही विश्व में शांति का संचार कर सकते है। आज मानवता को बाहरी विकास नहीं, आंतरिक संतुलन की आवश्यकता है। आइए, “अप्प दीपो भव” को अपनाएँ, स्वयं प्रकाश बनें और इस पृथ्वी को करुणा, समता और शांति से आलोकित करें।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि “धर्म कभी विभाजन का कारण नहीं, बल्कि मिलन का संगम का माध्यम है। चाहे वह भगवान बुद्ध का मार्ग हो या वेदों का ज्ञान, दोनों का मूल तत्व करुणा, सजगता और आत्मबोध ही है।”

बौद्ध प्रतिनिधियों ने भी अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि परमार्थ निकेतन में उन्हें एक वैश्विक आध्यात्मिक परिवार का अनुभव हुआ, जहाँ विविध परंपराएँ एक ही सत्य की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने विशेष रूप से गंगा आरती के दिव्य वातावरण, वेद मंत्रों की ध्वनि और प्रकृति के साथ सामंजस्य को एक अलौकिक अनुभूति बताया।

परमार्थ निकेतन में बुद्धिस्ट छात्रों के लिये सामूहिक ध्यान, शांति प्रार्थना और अंतरधार्मिक संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण और मानवता के कल्याण का संकल्प लिया।

विभिन्न देशों से आए छात्रों को परमार्थ निकेतन में भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और ध्यान की परंपराओं को समझने का अवसर प्राप्त हुआ, साथ ही उन्होंने अपनी परंपराओं और अनुभवों को भी साझा किया।

परमार्थ निकेतन परिवार की ओर से समस्त विश्व को बुद्ध पूर्णिमा की अनेकानेक शुभकामनाएँ और संदेश दिया कि अपने भीतर के दीप को पहचानो, करुणा को जीवन का आधार बनाओ, और सजगता के साथ इस पृथ्वी को एक बेहतर स्थान बनाने में अपना योगदान दो।

विज्ञापन
Copyright © All rights reserved. | Sakshar Haridwar Powered by www.WizInfotech.com.