श्रीमद्भागवत श्रवण से जीवन में धर्म, ज्ञान और भक्ति का संचार होता है कैलाश चंद्र गुप्ता
सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार,गीता कुटीर तपोवन में भागवत सप्ताह के तीसरे दिन उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
 
कथा व्यास पं. ब्रह्मरात हरितोष एकलव्य ने सुनाई वराह, वामन अवतार व ध्रुव चरित्र की कथा
हरिपुरकला, हरिद्वार, 11 जून 2026: गीता कुटीर
तपोवन, हरिपुरकला में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन बुधवार को कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा व्यास पं. ब्रह्मरात हरितोष एकलव्य ने भगवान की विभिन्न दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन कर श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
‘भागवत आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सेतु’ – पं. हरितोष एकलव्य
कथा व्यास पं. ब्रह्मरात हरितोष एकलव्य ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य सेतु है। जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ भागवत श्रवण करता है, उसके जीवन से अज्ञान और दुःख दूर होकर आध्यात्मिक प्रकाश का उदय होता है। उन्होंने कहा कि भगवान समय-समय पर अपने भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए विभिन्न अवतार धारण करते हैं।वराह, वामन व ध्रुव चरित्र की कथा से भाव-विभोर हुए श्रोता
तीसरे दिन की कथा में मुख्य रूप से भगवान वराह अवतार, कपिल मुनि द्वारा प्रदत्त सांख्य योग, वामन अवतार, सृष्टि के विस्तार, स्वायंभुव मनु तथा भक्त ध्रुव के प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा के दौरान भगवान वराह द्वारा पृथ्वी उद्धार, कपिल मुनि के ज्ञान एवं वैराग्य के उपदेश तथा राजा बलि और वामन भगवान के अद्भुत संवाद का वर्णन सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। ध्रुव की अटल भक्ति और 5 वर्ष की आयु में भगवान को पाने की तपस्या का प्रसंग सुनकर पंडाल में बैठे हर भक्त की आंखें नम हो गईं।
‘भागवत नैतिक मूल्यों के जागरण का महायज्ञ’ यजमान कैलाश चंद्र गुप्ता
इस अवसर पर यजमान कैलाश चंद्र गुप्ता ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना के जागरण का महायज्ञ है। “श्रीमद्भागवत श्रवण से जीवन में धर्म, ज्ञान और भक्ति का संचार होता है तथा जीवन को सही दिशा मिलती है,” उन्होंने कहा।
भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण
कथा के दौरान “ओम नमो भगवते वासुदेवाय”, “राधे-राधे” और “हरि बोल” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। “अच्युतम केशवम”, “श्रीमन नारायण” जैसे भजनों और संकीर्तन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। कथा के उपरांत आरती व प्रसाट वितरण किया गया।

