गुरु पूर्णिमा पर दीप्ति कुटीर में बरसा गुरु कृपा का स्वामी योगेश्वरानंद महाराज के श्री मुख से अमृत

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संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार हरिपुर गीता कुटीर वाली गली स्थित दीप्ति कुटीर आनंदवन में स्वामी योगेश्वरानंद महाराज के सानिध्य में धूमधाम से मना गुरु पूर्णिमा महापर्व हरिद्वार। धार्मिक नगरी हरिद्वार के हरिपुर कलां (गीता कुटीर वाली गली) स्थित ‘दीप्ति कुटीर आनंदवन’ में गुरु पूर्णिमा महापर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान परम पूज्य स्वामी योगेश्वरानंद जी महाराज के अलौकिक एवं पावन सानिध्य में देश-विदेश से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में नमन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

प्रातः काल से ही आश्रम परिसर गुरु भक्ति के भजनों और ‘गुरुदेव भगवान की जय’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गुरु पूजन, आरती और विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। गुरु ही ईश्वर तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग: पूज्य स्वामी जी महापर्व के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं को अपने श्रीमुख से ओजस्वी एवं भावपूर्ण उद्बोधन प्रदान करते हुए परम पूज्य स्वामी योगेश्वरानंद जी महाराज ने गुरु महिमा पर प्रकाश डाला। स्वामी जी ने कहा: “गुरु केवल एक व्यक्ति या शरीर नहीं, बल्कि एक चेतना और सनातन तत्व हैं। अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाली महाशक्ति का नाम ही ‘गुरु’ है। बिना गुरु की कृपा के ईश्वर की प्राप्ति और जीवन में आत्म-कल्याण संभव नहीं है। साधक को सदैव गुरु की आज्ञा और उनके बताए सन्मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। स्वामी जी के इस दिव्य उद्बोधन ने उपस्थित सभी भक्तों को भावविभोर कर दिया। उनके मुखारविंद से निकली गुरु महिमा की अविरल धारा में स्नान कर सभी श्रद्धालु कृतार्थ हुए।

भंडारे एवं सत्संग के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम सत्संग एवं उद्बोधन के पश्चात भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने पूज्य स्वामी जी का पूजन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके उपरांत आश्रम में विशाल भंडारे (प्रसाद) का आयोजन किया गया, जिसमें सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने दीप्ति कुटीर आनंदवन से गुरु भक्ति, शांति और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया।

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