गुरु कृपा ही परम कल्याण: कार्ष्णि भक्ति धाम-गुरुकुलम् में पूज्य स्वामी अमृतानंद जी महाराज के दिव्य सानिध्य में मनी गुरु पूर्णिमा
संपादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार,व्यास पूजा एवं गुरु पूर्णिमा के अति पावन अवसर पर प्रातः स्मरणीय, पूज्यपाद महामंडलेश्वर स्वामी अमृतानंद जी महाराज ने उपस्थित विशाल जनसमुदाय को अपने श्रीमुख से भक्ति और ज्ञान की अमृतधारा से सराबोर किया। गुरु पूर्णिमा पर महाराज जी की ज्ञान की अमृत वर्षा समारोह के दौरान व्यास पीठ पर विराजमान पूज्य अमृतानंद जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा के वास्तविक महत्व पर प्रकाश डालते हुए अपने भावपूर्ण उद्बोधन में कहा:
 
“गुरु पूर्णिमा केवल एक तिथि या पर्व नहीं है, यह तो शिष्य के हृदय में गुरु के प्रति कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का एक अलौकिक क्षण है। ‘गु’ का अर्थ है अंधकार और ‘रु’ का अर्थ है प्रकाश। जो हमारे जीवन से अज्ञान, भय और संशय का नाश कर दे, वही गुरु है।
महाराज जी ने भक्ति रस से परिपूर्ण वचनों में समझाया कि व्यास पूजा का मूल भाव जीवन में महर्षि वेदव्यास जी के विचारों और संस्कारों को अपनाना है। जब तक शिष्य के अंदर निष्काम भाव और अटूट श्रद्धा नहीं होगी, तब तक ज्ञान का दीपक प्रज्वलित नहीं हो सकता। उनके मुखारविंद से बही इस ज्ञान गंगा को पीकर वहां मौजूद हर भक्त भाव-विभोर हो उठा और पूरा प्रांगण ‘गुरुदेव भगवान की जय’ के जयकारों से गुंजायमान हो गया।
सनातन, शिक्षा और अध्यात्म का त्रिवेणी संगम: कार्ष्णि भक्ति धाम-गुरुकुलम्
कांगड़ी गाजीवाला की सुरम्य और शांत धारा पर स्थित यह गुरुकुलम् केवल एक आश्रम भर नहीं है, बल्कि यह **सनातन धर्म, आधुनिक शिक्षा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत केंद्र बनकर उभर रहा है।
पूज्य अमृतानंद जी महाराज के कुशल मार्गदर्शन और दूरदर्शी नेतृत्व में यह संस्थान बहुआयामी सेवाएं दे रहा है:
विश्व पटल पर सनातन का प्रसार: महाराज जी निरन्तर सनातन धर्म के मूल सिद्धान्तों—वसुधैव कुटुम्बकम्, करुणा, और सत्य—को विश्वभर में प्रचारित-प्रसारित कर रहे हैं। उनका जीवन सनातन की दिव्य ज्योति को जन-जन के मन में प्रज्वलित करने के लिए समर्पित है। शिक्षा के क्षेत्र में नया आयाम: गुरुकुलम् परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए, यहाँ भावी पीढ़ी को उत्कृष्ट लौकिक शिक्षा के साथ-साथ वेद, पुराण और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जा रही है। इससे बच्चों में कुसंस्कार मिटते हैं और वे एक आदर्श नागरिक बनते हैं। आध्यात्मिक चेतना का जागरण: यहाँ आने वाले साधकों, विद्यार्थियों और भक्तों को योग, ध्यान और भक्ति मार्ग का क्रियात्मक अभ्यास कराया जाता है, जिससे आज के तनावपूर्ण जीवन में लोगों को वास्तविक मानसिक शांति प्राप्त हो रही है। एक पावन संकल्प आज के इस आधुनिक और आपाधापी भरे दौर में, जहाँ मानवीय मूल्य और धर्म पीछे छूटते दिख रहे हैं, वहीं महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अमृतानंद जी महाराज जैसे उच्च कोटि के संत समाज के लिए एक सशक्त मार्गदर्शक का कार्य कर रहे हैं।
कांगड़ी गाजीवाला में उनके द्वारा रोपा गया यह ‘कार्ष्णि भक्ति धाम-गुरुकुलम्’ रूपी पौधा आज वटवृक्ष बनकर पूरे समाज को अपनी छाया और फल प्रदान कर रहा है। गुरु पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर महाराज जी के श्रीचरणों में शत-शत नमन करते हुए यही प्रार्थना है कि उनका यह पावन मार्ग दर्शन हम सभी को सदैव प्राप्त होता रहे। जय गुरुदेव! जय सनातन धर्म!

