माताजी की 100वीं जन्म जयंती पर सामूहिक साधना, शाम को दीपों ने रचा श्रद्धा का उजास
संपादक प्रमोद कुमार
अखंड जप, दीप यात्रा और संगीत प्रस्तुतियों के साथ माताजी के जीवन-संदेश को किया स्मरण
 
हरिद्वार 30 सितंबर। अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा जी की 100वीं जन्म जयंती के अवसर पर बुधवार को शांतिकुंज सहित देश विदेश के पांच हजार से अधिक प्रज्ञा संस्थानों में दिनभर विशेष आयोजन हुए। इसके साथ ही इस दो दिवसीय 100वीं जन्म जयंती कार्यक्रम का समापन हो गया। अखंड जप से शुरू हुआ कार्यक्रम दीप यात्रा, भजन-संगीत, संस्मरण और दीप महायज्ञ तक चला। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से माताजी के तप, साधना, सेवा, वात्सल्य और युग निर्माण के संदेश को स्मरण किया गया तथा जन्मशताब्दी वर्ष को साधना और सेवा के संकल्प से जोड़ने का आह्वान किया गया।
आयोजन का शुभारंभ 12 घंटे के अखंड गायत्री मंत्र जप से हुआ। शांतिकुंज के साधकों, कार्यकर्ताओं और परिजनों ने सामूहिक जप साधना में भाग लिया। जन्मशताब्दी वर्ष में आयोजित इस साधना क्रम को आत्मपरिष्कार, संस्कार संवर्धन और लोकमंगल के संकल्प से जोड़ा गया। इस अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि माताजी का जीवन तप, साधना, सेवा, त्याग और वात्सल्य का अनुपम संगम था। जन्मशताब्दी वर्ष उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का पावन अवसर है।
प्रातःकालीन सभा में शांतिकुंज महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने माताजी के जीवन से जुड़े संस्मरण साझा किए। वहीं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने माताजी के जीवन-दर्शन और जन्मशताब्दी वर्ष के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माताजी के आदर्शों को व्यक्तिगत जीवन, परिवार और समाज के आचरण में उतारना ही जन्मशताब्दी वर्ष की सार्थकता है।
सायंकाल जप के समापन पर भव्य दीप यात्रा निकाली गई। शांतिकुंज की बहनों के नेतृत्व में निकली यात्रा में बड़ी संख्या में साधक एवं परिजन हाथों में प्रज्वलित दीप लेकर शामिल हुए। दीपों से आलोकित परिसर में माताजी के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया। वहीं माताजी के जीवन पर आधारित भजन एवं संगीत प्रस्तुतियां हुईं। इनमें उनके तप, त्याग, सेवा, वात्सल्य और गुरुसत्ता के प्रति समर्पण से जुड़े प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया।
अंतिम चरण में ब्रह्मवादिनी बहनों ने भव्य दीप महायज्ञ कराया। परिजनों ने विश्वशांति, मानव कल्याण, नारी जागरण और युग निर्माण की मंगलकामना के साथ दीप प्रज्वलित किए। इस दौरान अंतेवासी कार्यकर्त्ता भाई बहिनों सहित देश के कोने कोने से आये हजारों नर नारी उपस्थित रहे।



