मास-ध्यान साधना शिविर 2026 का 22वाँ दिवस संपन्न
9 अक्टूबर को होगा मास-ध्यान साधना शिविर का भव्य समापन
 
हरिद्वार, शारदा पैलेस। महर्षि मेँहीँ अन्नक्षेत्र हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित मास-ध्यान साधना शिविर 2026 का 22वाँ दिवस श्रद्धा, साधना, अनुशासन एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। शिविर में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साधक नियमित रूप से ध्यान-साधना, सत्संग एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता कर रहे हैं।
22वें दिवस पर संत-महात्माओं ने साधकों को ध्यान, सत्संग, सदाचार, सेवा, आत्मचिंतन एवं नियमित साधना के महत्व पर मार्गदर्शन दिया। संतों ने कहा कि नियमित ध्यान एवं सत्संग से मनुष्य के जीवन में शांति, संयम और सकारात्मक विचारों का विकास होता है तथा साधक को आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर स्वामी गुरुनंदन जी महाराज, स्वामी गुरुशरण जी महाराज, स्वामी नंदन जी महाराज, स्वामी बिंदेश्वरी जी महाराज, स्वामी अभिषेकानंद जी महाराज, स्वामी संजीवानंद जी महाराज, स्वामी पंकज बाबा, स्वामी शंकर बाबा सहित अन्य संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। संतों के प्रवचन एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन से साधकों में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना रहा।
शिविर में प्रतिदिन प्रातःकालीन ध्यान-साधना, सत्संग एवं विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों का क्रम जारी है। शारदा पैलेस परिसर में शिविर के दौरान शांत, अनुशासित एवं भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
9 अक्टूबर को होगा भव्य समापन
मास-ध्यान साधना शिविर 2026 का भव्य समापन 9 अक्टूबर 2026 को शारदा पैलेस, हरिद्वार में होगा। समापन अवसर पर संत-महात्माओं के विशेष प्रवचन एवं आशीर्वचन सहित विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समापन समारोह में साधकों एवं श्रद्धालुओं की विशेष सहभागिता रहने की संभावना है।
आयोजक महर्षि मेँहीँ अन्नक्षेत्र हरिद्वार की ओर से समापन कार्यक्रम को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। शिविर के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही साधकों में समापन समारोह को लेकर विशेष उत्साह बना हुआ है।
शिविर का उद्देश्य ध्यान-साधना, सत्संग, सेवा एवं सदाचार के माध्यम से साधकों को आत्मिक उन्नति तथा आध्यात्मिक जीवन के प्रति प्रेरित करना है। 22वें दिवस तक साधकों की निरंतर सहभागिता बनी हुई है और आगामी दिनों में भी ध्यान-साधना एवं सत्संग का क्रम जारी रहेगा।
यह जानकारी स्वामी पंकज बाबा द्वारा दी गई।



