आधजगतगुरु श्री रामानंदाचार्य जी महाराज की 724 सी जयंती के अवसर पर श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के तत्वाधान में श्री रामानंद आश्रम श्रवण नाथ नगर हरिद्वार में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ
प्रमोद कुमार हरिद्वार
मनोज ठाकुर,हरिद्वार आधजगतगुरु श्री रामानंदाचार्य जी महाराज की 724 सी जयंती के अवसर पर श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के तत्वाधान में श्री रामानंद आश्रम श्रवण नाथ नगर हरिद्वार में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ जिसमें हरिद्वार के तथा ऋषिकेश के अनेको मठ मंदिर आश्रम अखाड़े के महंत श्री महंत साधु संतों ने भाग लिया इस अवसर पर बोलते हुए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा जगतगुरु रामानंदाचार्य जी महाराज धर्म के अवतार थे लोगों को सच्चाई के साथ जीना सिखाया उन्होंने संपूर्ण धर्म समाजों में एक साथ धर्म की अलख जगाई इस अवसर पर बोलते हुए आश्रम के श्री महंत प्रेम दास महाराज ने कहा जगतगुरु रामानंदाचार्य जी महाराज ने समाज में फैली कुकृतियों और भ्रांतियां को दूर किया सभी को एक साथ मिलजुल कर रहने का संदेश दिया संपूर्ण विश्व में सनातन की धर्म ध्वजा फैलाई इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत रघुवीर दास जी महाराज ने कहा आध जगत गुरु रामानंदाचार्य जी महाराज ने अपने ज्ञान के प्रकाश से समाज को एकता के सूत्र में बांधा तथा भगवान से जोड़ते हुए सभी को कल्याण की ओर अग्रसर किया इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत विष्णु दास ने कहा जगतगुरु रामानंदाचार्य जी महाराज ने विश्व में ज्ञान की वर्षा की समाज से जात पात का भेदभाव मिटाया सभी को एकता के सूत्र में बंध कर रहने का संदेश दिया इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतनानंद महाराज महामंडलेश्वर ललितानंद महाराज महामंडलेश्वर दुर्गादास महाराज बाबा हठ योगी महाराज बड़ा अखाड़ा कनखल के सचिव राघवेंद्र दास महाराज महंत सूरज दास महाराज महंत जय रामदास महाराज श्री नारायण दास पटवारी महाराज श्री गंगा दास महाराज महंत हरिदास महाराज महंत सरयू दास महाराज महत सूरज दास महाराज महंत गुरमल सिंह महंत प्रहलाद दास महाराज महंत बिहारी शरण दास महाराज महंत साध्वी रंजना दास महाराज महंत साध्वी गंगा दास जी महाराज स्वामी रामचरण दास जी महाराज महंत हितेश दास महाराज धर्मदास महाराज श्याम गिरी महाराज सरवन दास महाराज वरिष्ठ कोतवाल कालीचरण ।जी महाराज सहित भारी संख्या में संत महंत भक्तगण उपस्थित थे सभी ने आयोजित भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य और कृतार्थ किया।
 

