श्रीमद् भागवत कथा जगत कल्याणकारी मानव कल्याण सुधा रस है-आचार्य श्री अमित शास्त्री

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हरिद्वार भूपतवाला स्थित अग्रवाल भवन में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का दिव्य शुभारंभहरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के भूपतवाला स्थित अग्रवाल भवन में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का प्रथम दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा व्यास परम पूज्य आचार्य श्री अमित शास्त्री जी ने अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की मंगलमयी कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात् स्वरूप है। जो श्रद्धापूर्वक इसका श्रवण करता है, उसके जीवन के अज्ञान, मोह और दुःख का नाश होकर भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य का उदय होता है।

 

प्रथम दिवस की कथा में आचार्य श्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा, नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों द्वारा सूत जी से किए गए प्रश्न तथा कलियुग में भगवान के नाम, कथा और सत्संग की महत्ता का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को ईश्वर से जोड़ने का सबसे सरल और प्रभावी साधन है। कथा का श्रवण करने वाले श्रद्धालु भावविभोर होकर अपने जीवन को धन्य एवं सार्थक बना रहे हैं।

इस पावन अवसर पर प्रातःस्मरणीय गुरु भगवान परम पूज्य अद्वैत स्वरूप जी महाराज का दिव्य सानिध्य एवं मंगलमय आशीर्वाद भी सभी श्रद्धालुओं को प्राप्त हो रहा है। गुरु महाराज की पावन उपस्थिति से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा।

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के मुख्य यजमान के रूप में बरनाला से श्रद्धेय श्री पवन जी, श्री विनोद जी एवं श्री रमेश जी, तथा चीका से श्री नरेश जी एवं पटियाला से पधारे श्रद्धालु परिवार श्रद्धा एवं समर्पण भाव से इस दिव्य आयोजन को संपन्न करा रहे हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।

यजमानों के विचार

श्री पवन जी (बरनाला):

“श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हमारे जीवन का सौभाग्य है। प्रभु कृपा से यह अवसर मिला है कि संतों का सानिध्य और कथा श्रवण का पुण्य प्राप्त हो रहा है।”

श्री विनोद जी (बरनाला):

“हमारी कामना है कि इस कथा के माध्यम से समाज में धर्म, संस्कार और भक्ति का प्रकाश फैले तथा प्रत्येक परिवार भगवान से जुड़े।”

श्री रमेश जी (बरनाला):

“कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में अपनाने का संदेश देती है। यह आयोजन सभी के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए, यही हमारी प्रार्थना है।”श्री नरेश जी (चीका):”हरिद्वार की पावन भूमि पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करना हमारे लिए परम सौभाग्य का विषय है। भगवान एवं गुरु महाराज की कृपा से यह दिव्य सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है। सभी धर्म प्रेमी

श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का श्रवण कर अपने जीवन को धर्ममय एवं कल्याणमय बनाने का आग्रह किया।

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